- 2015 में आए भूकंप में चिह्नित हुए थे 75 जर्जर मकान

- केवल दो मकान पर हुई थी कार्रवाई

- 73 मकान को में 50 को नोटिस तक नहीं दिया गया

GORAKHPUR: नगर निगम अपनी जिम्मेदारी की केवल खानापूर्ति करता है. यही कारण है कि नगर निगम की कार्यशैली से पब्लिक हमेशा नाराज रहती है और कार्यशैली पर हमेशा सवाल उठते हैं. इसलिए अप्रैल 2015 में शहर के 75 जर्जर मकानों को तोड़ने के लिए आदेश मिला था, लेकिन केवल दो बिल्डिंग को तोड़कर नगर निगम ने केवल खानापूर्ति किया है. जबकि, शहर में अभी भी 73 मकानों को तोड़ने का कार्य अटका पड़ा है. मोहल्लों की गलियों में खड़े मकान भले लोगों के मन में मौत का डर पैदा कर रहे हैं, लेकिन इनमें रहने वाले लोग ऐसे रह रहे हैं, जैसे इनको मौत से डर ही नहीं है.

अधिकांश मकान 1900 से 1930 के बने हैं

शहर में जो भी जजर्र भवन हैं, उसमें से अधिकतर मकान 1900 से लेकर 1930 के है. नगर निगम के चीफ इंजीनियर एसके केसरी का कहना है कि भूकंप के बाद शहर में 75 मकान चिह्नित किए गए थे, जिनको तोड़ने की योजना नगर निगम ने बनाया था.

दो पर कार्रवाई 23 को नोटिस

अप्रैल 2014 में भूकंप आने के बाद जिला प्रशासन के निर्देश नगर निगम ने 75 जर्जर मकानों को चिह्नित किया था. उसके बाद दो दिन अभियान चलाकर दो बिल्डिंग को तोड़ने की कार्रवाई की गई. उसके बाद 23 मकानों को नोटिस दिया गया था, नगर निगम द्वारा दी गई इस नोटिस के बाद नगर निगम भूल गया. स्थित यह है कि 50 मकानों को तोड़ने की बात कौन करे नोटिस तक नहीं दिया गया.

फोटो कैप्सन

फोटो नंबर- आरजे 36

बसंतपुर नरकटिया में आवासीय मकान में जमा पाकड़ का पेड़

फोटो नंबर- आरजे 41

बसंतपुर मदरसा चौराहा रोड में आवासीय एरिया में बंद जर्जर मकान डरा रहा लोगों को

फोटो नंबर- आरजे 35

लालडिग्गी पार्क के किनारे बनी नगर निगम की दुकानों का टूटता हिस्सा

फोटो नंबर- आरजे 33

साहबगंज मंडी में जर्जर मकान डराती है व्यापारियों को

कुछ जर्जर मकानों को नोटिस उस समय दिया गया था, उसके बाद कुछ प्राब्लम आने के कारण कार्रवाई रूक गई. जल्द अभियान चलाया जाएगा.

एसके केसरी, चीफ इंजीनियर नगर निगम