क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: भू-राजस्व विभाग के पास उपलब्ध नक्शों पर आज भी तालाबों व अन्य जल स्त्रोतों की पूरी जानकारी मौजूद है, लेकिन स्थल निरीक्षण में कहीं कोई तालाब नहीं मिल रहा है. तालाब का सारा पानी जमीन माफिया डकार चुके हैं और तालाबों में मिट्टी भरकर जमीन बेच दी गयी है. जहां तालाब होने चाहिए थे वहां अब आलीशान मकान और पूरा मोहल्ला बस गया है. मामले के संबंध में पूछने पर अंचल अधिकारियों का कहना है कि पुराना मामला है, उस टाइम हमलोग इस अंचल में पोस्टेड भी नहीं थे पहले ही गड़बड़ी हुई है.

शहर से गांव तक तालाब गायब

सिटी में पानी की भारी किल्लत हो रही है और उसके पीछे सबसे बड़ा कारण जलस्रोतों पर अतिक्रमण के रूप में सामने आया है. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक माफियाओं ने कब्जा कर लिया. सिटी के जेल रोड स्थित तालाब, कोकर का तालाब, बड़गाईं, मिसीरगोंदा, हात्मा, हेसल, सुखदेवनगर समेत रातू, नगड़ी, कांके के कई ग्रामीण इलाकों में भी तालाबों पर कब्जा किया जा रहा है.

अफसरों की आंखों के सामने गोरखधंधा

भू-राजस्व से जुड़े अधिकारियों-कर्मियों की मिलीभगत के बिना आखिर इतना बड़ा गोरखधंधा कैसे अंजाम दिया जा सकता है. नक्शे पर तालाब व अन्य जलस्रोत साफ दिखाई देते हैं. इसके बावजूद इन जमीनों की धड़ल्ले से रजिस्ट्री भी होती है और दाखिल-खारिज भी हो जाता है. इतना ही नहीं, आरआरडीए और नगर निगम इसके लिए नक्शा भी पास कर देते हैं, जिसपर बहुमंजिली इमारतें खड़ी हो जा रही हैं.

तालाब बता जमीन मालिक को फंसाया

भूमाफिया जिस जमीन से करोड़ों रुपए कमाते हैं उसे खरीदने के लिए जबरदस्त तरीका अपनाते हैं. तालाब की कई जमीनें रैयती हैं या निजी लोगों की जमीन है. माफियाओं द्वारा पहले जमीन मालिक को कहा जाता है कि तालाब है सारे अधिकारियों को, लोकल लोगों को मैनेज करना होगा, बहुत विवाद है जैसी बातें कहकर सस्ती दर पर जमीन मालिक से करार करते हैं उसके बाद उसे भरकर करोड़ों की कीमत पर बेच देते हैं.

वर्जन

इस मामले की पहले से छानबीन चल रही है. सभी अंचल अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई थी लेकिन अधिकारी बदलते रहे जिसके कारण थोड़ा विलम्ब हुआ है. जांच की जा रही है कि मामला कहां अटका है.

आर महिमापत रे, डीसी, रांची