कानपुर। देश को झकझोर देने वाले निर्भया कांड को याद कर आज भी लोग सिहर उठते हैं। ऐसा लगता है मानों यह कल की घटना हो। 16 दिसंबर, 2012 की रात को करीब 23 वर्षीय पैरामेडिकल छात्रा निर्भया अपने एक दोस्त संग बस में चढ़ी थी। इस दाैरान उसके साथ पांच दरिंदों ने चलती बस में सामूहिक दुष्कर्म किया था। डाॅक्टरों ने खुद इस बात की पुष्टि की थी उसके साथ बेहद हैवानियत वाला सुलूक हुआ था। निर्भया 13 दिन तक माैत से लड़ने के बाद आखिर हार गई थी और सिंगापुर में दम तोड़ दिया था।

खुद को कभी भी कमजोर नहीं समझे
निर्भया के साथ हुए इस हादसे को लेकर उसे इंसाफ दिलाने के लिए बड़े स्तर पर धरने-प्रदर्शन हुए। मामला फिलहाल अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। वहीं आज निर्भया की मां आशा देवी ने बेटी को याद कर कहा कि दुष्कर्म जैसे अपराध के मामलों में अपराधी आज भी जीवित हैं। यह कानून व्यवस्था की बडी़ विफलता है। हम लड़कियों से कहना चाहते हैं कि वो खुद को कभी भी कमजोर नहीं समझे । वहीं उनके मां-बाप से यह कहना चाहते हैं कि वह कभी भी अपनी लड़िकयों को शिक्षा मुहैया कराने से नहीं हिचके।

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