भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने भविष्यवाणी की थी कि इस वर्ष कमजोर मानसून के कारण औसत से कम बारिश 88 फीसदी होगी। इसे स्काइमेट ने खारिज कर दिया है  उसके अनुसार इस साल मानसून सामान्य रहेगा। जिसके चलते बारिश भी सामान्य होगी। अलनीनो के असर के चलते वर्षा के प्रभावित होने की संभावना अब दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। स्काइमेट की माने तो अलनीनो दरअसल, 2014 से ही जारी है। पिछले साल ये काफी असरदार था जिस वजह से सामान्य से कम 88 फीसदी बारिश के कारण सूखा भी पड़ा था। पर इस साल ये काफी कमजोर हो चुका है। जिससे यह बारिश को खास प्रभावित नहीं कर सकेगा। अगर इतिहास पर नजर डरलें तो 140 वर्षों में लगातार दूसरे वर्ष में सूखा पड़ने की घटनाएं केवल चार बार 1904-05, 1965-66 और 1985-86-87 में ही हुई हैं। पिछले साल अलनीनो काफी स्ट्रांग था पर अब ये उतार पर है, इसलिए इस साल मानसून को ज्यादा प्रभावित नहीं कर सकेगा। इसके अलावा हिंद महासागर में भी परिस्थितियां मानसून के अनुकूल दिखाई पड़ रही हैं और इंडियन ओशन डाइपोल भी अलनीनो को कमजोर करने के ही आसार दिखा रहा है। ऐसे ही संकेत बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से भी मिल रहे हैं।
 
उछाल पर बाजार
दलाल स्ट्रीट में बुधवार को लगातार चौथे सत्र में तेजी का सिलसिला जारी रहा। सामान्य से कम मानसून रहने की चिंता खत्म होने और रुपये की मजबूती से उत्साहित निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में लिवाली की। इससे बंबई शेयर बाजार (बीएसई) का सेंसेक्स 146.15 अंक चढ़कर 26832.66 अंक पर पहुंच गया। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 44.25 अंक सुधरकर 8091.55 अंक पर बंद हुआ।

मानसून अब तक औसत से बेहतर रहा है। साथ ही मई में देश का व्यापार घाटा भी कम होकर तीन माह के निचले स्तर पर पहुंच गया है। इस बात से बाजार की कारोबारी धारणा मजबूत बनी हुई है। तीस शेयरों वाला सेंसेक्स 26815.41 अंक पर मजबूत खुला। इसका निचला स्तर 26728.89 अंक रहा। निवेशकों की लिवाली के झोंके में इस दिन सेंसेक्स ने 26983.48 अंक का ऊंचा स्तर छुआ।

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