- 18 लाख वाहनों के पास नहीं हैं पीयूसी सर्टिफिकेट

- 3 लाख से अधिक वाहनों का किया गया री रजिस्ट्रेशन

- 1000 रुपये जुर्माना वसूलने का नियम पीयूसी सर्टिफिकेट न मिलने पर

- 756 चालान काटे गये एक साल में पॉल्यूशन के

- पॉल्यूशन दिल्ली जैसा, लेकिन खूब दौड़ाइयें पुरानी गाडि़यां

- परिवहन विभाग की नजर में प्रदूषित नहीं है शहर

- पुराने वाहनों का कराइये रजिस्ट्रेशन और भरिए फर्राटा

LUCKNOW: दिल्ली और एनसीआर में बढ़ते पॉल्यूशन को देखते हुए वहां पुरानी गाडि़यों के री रजिस्ट्रेशन बंद किए जा चुके हैं। वहीं पॉल्यूशन के मामले में नवाबों की नगरी लखनऊ भी खतरनाक स्तर पर पहुंच रही है फिर भी यहां पर पॉल्यूशन को रोकने के लिए परिवहन विभाग के अधिकारी कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। आलम यह कि यहां पर गाडि़यों के री रजिस्ट्रेशन होने से शहर की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है। फिर भी पुराने वाहनों के धड़ल्ले से री रजिस्ट्रेशन किए जा रहे हैं। 15 नहीं 30-30 साल पुराने वाहनों के री रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं।

बंद हो चुका पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन

दिल्ली और एनसीआर में 15 साल पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद हो गया है। रोडवेज को भी वहां पर सिर्फ सीएनजी बसों के संचालन की छूट है। डीजल बसों को एंट्री नहीं दी जा रही है। हवा में बढ़ते पॉल्यूशन को देखते हुए एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने कड़ाई से इन नियमों को पालन करने के आदेश दिए हैं। साथ ही वहां पर लगातार वाहनों में पॉल्यूशन की चेकिंग का अभियान भी चलाया जाता है।

अनिवार्य होने के बाद भी नहीं होती जांच

वहीं लखनऊ में लगातार वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद भी परिवहन विभाग के अधिकारी इससे अंजान बने हुए हैं। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि आरटीओ ऑफिस में किसी भी काम से आने वाली गाड़ी का प्रदूषण जांचा जाना अनिवार्य है, लेकिन कोई जांच नहीं की जाती है। प्रदूषण चेकिंग के लिए पिछले एक साल से कोई अभियान नहीं चला है। अनुमान है कि तकरीबन 18 लाख से अधिक वाहन राजधानी की सड़कों पर जहर उगल रहे हैं।

30 साल से अधिक पुराने वाहन हैं रजिस्टर्ड

मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। राजधानी के आरटीओ और एआरटीओ ऑफिस में पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन धड़ल्ले से हो रहा है। आरटीओ ऑफिस में 30-30 साल पुराने वाहन री रजिस्ट्रेशन वाले मौजूद हैं। इन पर कोई अंकुश नहीं लगाया जाता। इतना जरूर है कि इन वाहनों का री रजिस्ट्रेशन पांच साल के लिए होता है। शायद विभागीय अधिकारियों को यहां पर पुरानी गाडि़यों के री रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने के लिए एनजीटी के आदेशों का इंतजार है। आरटीओ ऑफिस के कर्मचारियों के अनुसार राजधानी में तकरीबन 5 लाख से अधिक री रजिस्ट्रेशन वाले वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इन वाहनों से निकलने वाला जहरीला धुंआ यहां की हवा को और भी जहरीला बना रहा है। सिर्फ प्राइवेट वाहन ही नहीं उम्र पूरी कर चुकी रोडवेज की डीजल बसें भी राजधानी में धुंआ उड़ाते हुए लगातार दौड़ रही हैं। बसों में निकलते हुए प्रदूषण को रोकने के लिए स्मोक मीटर लगाए जाने थे, उनका कोई पता नहीं है।

कोट

ऐसा नहीं है प्रदूषण के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलता है। विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए लोगों को प्रदूषण से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जाता है।

एके सिंह

आरटीओ

कोट

प्रदूषण को लेकर एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। जिन गाडि़यों में प्रदूषण के लिए जारी किया जाने वाला सर्टिफिकेट नहीं होगा, उनके खिलाफ चालान की कार्रवाई की जाएगी।

अनिल मिश्रा

डीटीसी लखनऊ जोन

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वाहनों के पास नहीं हैं पीयूसी

परिवहन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सिर्फ पब्लिक ही नहीं राजधानी के सरकारी विभागों में प्रयोग किये जा रहे अधिकांश वाहनों के पास पीयूसी (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) नहीं है। नए वाहनों को एक साल तक छूट दी जाती है। उसके बाद उन्हें भी पीयूसी लेना होता है।

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वाहन की नहीं तय है उम्र

यहां पर गाडि़यों की कोई उम्र निर्धारित नहीं है। शहर का वाहन है और उसे जब तक चलाया जा सकता है तब तक उसका रजिस्ट्रेशन आरटीओ ऑफिस में होता रहेगा। गाडि़यों की उम्र निर्धारित ना होने के कारण शहर में प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ रही है।