आई एक्सक्लूसिव--

--जर्मनी के ल्यूबेक यूनिर्वसिटी के लैब में मेडिसीन का होना है टेस्ट

--इंस्टीट्यूट के बी फॉर्मा डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ बीएन सिन्हा के रिसर्च का है नतीजा

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क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ (25 न्श्चह्मद्बद्य): बीआईटी मेसरा के वैज्ञानिकों द्वारा ईजाद दवा अब डेंगू और चिकुनगुनिया बीमारी के इलाज में रामबाण साबित होगा. इंस्टीट्यूट के बी फार्मा डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ बीएन सिन्हा की टीम ने आठ सालों के रिसर्च के बाद इस दवा को तैयार किया है. फिलहाल, इस दवा को टेस्ट के लिए जर्मनी के ल्यूबेक यूनिर्वसिटी का लैब भेजा गया है. यहां सभी मानकों पर खरा उतरने के बाद इस दवा का इस्तेमाल मरीजों के इलाज में किया जाएगा. मालूम हो कि डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी का आज भी कोई स्पेसिफिक दवा उपलब्ध नहीं है. ऐसे में इस बीमारी को जड़ से खत्म करने में दिक्कतें आ रही हैं.

पॉजिटिव मिले हैं रिजल्ट

डॉ बीएन सिन्हा ने बताया कि किसी भी ड्रग को तैयार करने के लिए कई सालों तक रिसर्च होता है. कई तरह के टेस्ट से गुजरने के बाद ही उसे बाजार में उतारा जाता है. ऐसे में डेंगू और चिकनगुनिया बीमारी के दवा को तैयार करने के लिए बीआईटी में हमारी टीम आठ साल से रिसर्च कर रही है. इस दौरान जितने भी स्तर पर इस दवा के परीक्षण किए गए हैं उसके रिजल्ट पॉजिटिव आए हैं. अब अंतिम दौर का टेस्ट चल रहा है. इसके लिए दवा को जर्मनी के ल्यूबेक यूनिर्वसिटी के लैब में भेजा गया है.

2010 से दवा पर चल रहा रिसर्च (बॉक्स)

डेंगू चिकनगुनिया दवा पर रिसर्च करने वाले प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ बीएन सिन्हा ने बताया कि इंडो-जर्मन प्रोजेक्ट के तहत डेंगू- चिकनगुनिया के दवा पर 2010 से रिसर्च हो रहा है. इसमे तहत ड्रग के मॉलिक्यूल को डिजाइन किया गया है. ड्रग की डिस्कवरी भी की गई है. अभी तक के रिसर्च में ड्रग के कंपाउंड के असर दायक होने व लैब में टेस्ट के पॉजिटिव रिजल्ट मिले हैं. अब जर्मनी के ल्यूबैक यूनिवर्सिटी के लैब में टेस्टिंग के बाद इसकी बायलॉजिकल स्क्रिनिंग होगी.

डेंगू-चिकनगुनिया की अभी नहीं है स्पेसिफिक मेडिसीन (बॉक्स)

डेंगू चिकनगुनिया की बीमारी को ठीक करने को लेकर अभी तक कोई भी स्पेसिफिक दवा बाजार में उपलब्ध नहीं है. डॉक्टरों द्वारा जेनरल दवाओं का सहारा लेकर अभी इस बीमारी को ठीक करने की कोशिश की जा रही है, इसमें से बहुत सारे लोगों को यह ठीक से होता है और बहुत सारे लोगों पर इसका असर नहीं होता है. अगर इस दवा का टेस्टिंग सफल होता है तो मरीजों का इलाज करने में काफी सहूलियत हो जाएगी.