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LUCKNOW : काबीना मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने बताया कि देवरिया के मां विंध्यवासिनी महिला प्रशिक्षण एवं समाज सेवा संस्थान के द्वारा संचालित बालिका गृह में रहने वाली संवासिनियों की मेडिकल जांच में उनके साथ शारीरिक शोषण की पुष्टि हो गयी है। जांच के दायरे में 70 लोग हैं जिनकी तलाश की जा रही है। साथ ही वहां से गायब हुई 18 बच्चियों की तलाश में भी कई टीमें लगाई गयी हैं। उनका अगले 48 घंटे में पता लगने की उम्मीद है। उच्चस्तरीय जांच समिति ने बच्चियों के बयान रिकॉर्ड किए हैं और उनका मेडिकल चेकअप भी कराया है। मंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 में जब इस संस्था को बंद करने के आदेश दिए गए उस समय यहां 28 बालक-बालिकाएं थीं। जबकि, अभी 23 ही मिली हैं। इनमें तीन बालक और 20 बालिकाएं हैं। वहीं, संस्था के रिकार्ड में 42 बालक-बालिकाओं के नाम दर्ज हैं। ऐसे में बाकियों की तलाश की जा रही है।

संस्था को पुलिस ही सौंपती थी बच्चे
मंत्री ने यह खुलासा भी किया कि संस्था को बंद करने के आदेश के बावजूद स्थानीय पुलिस वहां पर बच्चों को भेजती थी, जबकि शासन के आदेश की जानकारी डीएम और डीपीओ को थी। जांच के दौरान डीएम, डीपीओ, डीसीपीओ को भेजे गये सभी पत्रों की पड़ताल भी हो रही है। देवरिया जिला प्रशासन द्वारा संस्था को बंद करने के लिए 15 बार नोटिस दिया गया। वहीं डीपीओ ने भी 11 बार नोटिस देकर उसे बंद कराने की कोशिश भी की लेकिन हर बार कोर्ट का सहारा लेकर वह बचते रहे। को सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पूरे प्रदेश में हर तरह के संरक्षण गृहों का निरीक्षण किया जा रहा है। सरकार ने इस मामले में पूरी तत्परता के साथ कार्रवाई की है जो पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष भी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रकरण में लिप्त कोई भी व्यक्ति बख्शा नहीं जाएगा।

पिछली सरकारों पर लगाया आरोप
रीता जोशी ने पिछली सरकारों पर आरोप लगाते हुए कहा कि जो दल इसे राजनैतिक मुद्दा बना रहे हैं उनके ही कार्यकाल में इस संस्था का जन्म हुआ। इस बालिका गृह को वर्ष 2010 में मान्यता और काम दिया गया। इतना ही नहीं, उसे बाल गृह, बालिका गृह, शिशु गृह, एडॉप्शन होम का काम भी सौंप दिया गया। गौरतलब है कि वर्ष 2010 से 2014 तक बसपा और सपा की सरकार थी। सपा सरकार में ही 281 एनजीओ को सचल पालना गृह का काम दिया गया था जिसमें बड़ा घोटाला सामने आया था। हाईकोर्ट के आदेश पर इसकी जांच सीबीआई कर रही है। देवरिया की तरह संरक्षण गृह चलाने वाले 21 एनजीओ को यह काम भी मिला था। हमने इन सभी 21 एनजीओ की मान्यता समाप्त कर दी है। इसका पत्र संबंधित जिले के डीएम और डीपीओ को भेजा जा चुका है।  

सीडब्ल्यूसी भी जिम्मेदार

उन्होंने यह भी कहा कि इसके पीछे चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी)\क्र \स्भी जिम्मेदार है जिसे महीने में 20 बार संस्थाओं के साथ बैठक करनी होती है। इसके लिए राज्य सरकार उन्हें भुगतान भी करती है। खुलासा किया कि सपा सरकार के अंतिम दौर में सीडब्ल्यूसी में नियुक्तियां की गयी। जिस तरह यूपी पीएससी में गड़बडिय़ों को अंजाम दिया गया, उसी तरह सीडब्ल्यूसी में गलत लोगों को सदस्य बना दिया गया। देवरिया की दागी संस्था की काउंसलर प्रतिभा श्रीवास्तव को भी सदस्य बनाया गया था। अब हम इसे सुधार रहे हैं। हमारी कोशिश है कि जिलों के बजाय अब मंडल स्तर पर बड़े संरक्षण गृह बनाए जाएं ताकि उसकी मॉनिटरिंग ठीक से हो सके।

हरदोई में महिलाएं गायब नहीं
हरदोई स्थित स्वाधार गृह से महिलाएं गायब नही हुई थी बल्कि प्राप्त सूची में नाम फर्जी थे, जिसकी जांच के आदेश दे दिये गये हैं। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने इस बाबत स्पष्ट किया है कि हरदोई के बेनीगंज कस्बे में आयशा ग्रामोद्योग का डीएम पुलकित खरे द्वारा सोमवार को आकस्मिक निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान 21 पंजीकृत महिलाओं में दो महिलाएं ही मौके पर मौजूद पायी गई थी। शेष अपात्र महिलाओं के नाम फर्जी तरीके से सूची में अंकित किये गये थे। कोई भी महिला गायब नहीं थी, अनुदान लेने के लिए फर्जी सूची तैयार की गई थी। माना जा रहा है कि ये महिलाएं आसपास के गांवों की हैं, जिनके पते सूची में डाले गये है। इसकी जांच के आदेश एवं संस्था के विरुद्ध कार्रवाई किये जाने के निर्देश भी जारी किये जा चुके हैं। डीएम ने बताया कि आयशा ग्रामोद्योग समिति पिहानी के संस्थापक एवं अधीक्षिका के खिलाफ  420, 467, 468, 491, 477, एवं 465 की धाराओं में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।

फैक्ट फाइल

- जून 2017 में संस्था की सारी मान्यताएं खत्म कर बंद करने का दिया आदेश
- 21 ऐसी ही संस्थाओं समेत 280 एनजीओ को सपा ने सचल पालना गृह का काम दिया
- 15 बार जिला प्रशासन ने संस्था को बंद करने के लिए भेजा था नोटिस
- 11 बार डीपीओ ने भी नोटिस भेजा, बंद कराने की कोशिश भी की
- 31 जुलाई को शासन के निर्देश पर संस्था के खिलाफ एफआईआर दर्ज

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