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LUCKNOW : विपक्ष के हंगामे की वजह से दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ गयी। विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने इस मामले की जांच में लीपापोती करने को एसआईटी का गठन किया है और इस मामले की जांच सीबीआई से नहीं करायी जा रही है। विपक्ष ने इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज से कराने की मांग की। वहीं हंगामे के बीच सदन में तमाम विधेयक पटल पर रखे गये और अनुपूरक बजट पेश किया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही मंगलवार तक स्थगित कर दी गयी।

मुख्यमंत्री ने दिया करारा जवाब
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद टंडन हॉल में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देवरिया का जो मुद्दा उठाया गया, उसमें सरकार ने प्रभावी कार्यवाही की है। 2009 में इस संस्था को मान्यता मिली थी तब किसकी सरकार थी, ये किसी से छिपा नहीं है। जून 2017 में हमारी सरकार ने ऐसे सब संस्थान बंद करने अनुदान समाप्त करने का प्रावधान किया था। जिसने कार्यवाही में शिथिलता बरती, उसे सजा दी गयी। हमने सीबीआई जांच की सिफारिश भी की। अपने नकारेपन को छिपाने के लिए विधानसभा में महत्वपूर्ण अनुदान मांगों और जनहित के मुद्दों पर चर्चा की बजाय विपक्ष ऐसे मुद्दे उठा रहा जो न्यायाधीन है।

इनके चेहरे को प्रदेश पहचानता
देवरिया के लिए वे सरकारें दोषी हैं जिन्होंने मान्यता और अनुदान दिया। इनके चेहरे को प्रदेश पहचानता है। दावा किया कि प्रदेश में कानून व्यवस्था पिछले 15 सालों में सबसे बेहतर है। इसका प्रमाण इंवेस्टर्स समिट भी है जिसमें 4.68 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए और हाल ही में इसमें से 60 हजार करोड़ की योजनाओं की ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी भी आयोजित की गयी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत दुखद स्थिति है कि सदन को चर्चा के लिए चुनने की बजाय अनावश्यक हो-हल्ला करने का माध्यम बनाया जा रहा है। चंद मु_ी भर लोग विधानसभा को बंधक बना कर अन्य का हक मारने का प्रयास कर रहे हैं। ये लोकतंत्र के लिए शुभ नहीं है।

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