क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : झारखंड में कोयले के रॉयल्टी से ही करीब 3500 करोड रूपए की कमाई हुई है. अकेले धनबाद से करीब 1200 करोड रूपए की रॉयल्टी मिली है तो रामगढ़ और चतरा से 11-11 सौ करोड रूपए की रॉयल्टी मिली है. इसमें रांची से भी 129 करोड रूपए की रॉयल्टी मिली है. 2017-18 का राजस्व वसूली का डाटा हर विभाग ने कर लिया है. हालांकि, अधिकतर विभागों ने तय टारगेट से बहुत कम वसूली की है. 2017-18 में खनन विभाग ने 8500 करोड रूपए के राजस्व वसूली का टारगेट तय किया था, लेकिन वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद विभाग को करीब 5700 करोड रूपए राजस्व की वसूली हो पाई है.

शराब से कमाई हुई आधी

राज्य सरकर ने 2017-18 में उत्पाद नीति बदलते हुए शराब व्यवसाय को अपने हाथों में ले लिया. सरकार ने इस वित्त वर्ष में 1600 करोड़ राजस्व वसूली का टारगेट रखा था. जिसके एवज में सरकार मार्च खत्म होने तक करीब 825 करोड़ ही वसूल पायी है. दूसरी तरफ सरकार के शराब बिक्री का काम अपने हाथ में लेने से दुकानों में कमी आई.

रजिस्ट्री से भी हुई कम वसूली

सरकार ने महिलाओं के लिए एक और अहम योजना की शुरूआत की. महिलाओं के नाम एक रुपए में निबंधन शुरू करने के बाद राजस्व वसूली में काफी गिरावट देखने को मिल रही है इस वित्त वर्ष में सरकार ने निबंधन से 900 करोड़ का टारगेट रखा था, लेकिन 2018 मार्च तक सरकार को निबंधन से सिर्फ 446 करोड़ रुपये की कमाई हुई.

खदानों से कम निकला राजस्व

खनन विभाग ने इस वित्त वर्ष में 8508 करोड़ के टारगेट का पीछा करते हुए 5485 करोड़ की कमाई की. परिवहन विभाग का 1500 करोड़ का टारगेट था, लेकिन कमाई हुई सिर्फ 780 करोड़. जबकि भू-राजस्व विभाग 400 करोड़ के बदले सिर्फ 101 करोड़ की ही कमायी कर पाया.