Identity पर कर रहे attack
कंट्री में हुए टेररिस्ट्स अटैक में यह बात सामने आयी है कि उनके द्वारा ज्यादातर ऐसे प्लेसेज पर अटैक किया जाता है, जिसकी ग्लोबली बेहतर पहचान रही है. इनमें अक्षरधाम मंदिर, होटल ताज, वाराणसी स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर के अलावा अब बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर भी शामिल हो गया है. महाबोधि मंदिर बौद्ध धर्म के लोगों का पूजा स्थल है और वल्र्ड में फैले बौद्धिस्ट्स के लिए यह एक पवित्र स्थान है. टूरिस्ट्स भी यहां घुमने के लिए आते हैं. ऐसे में इस प्लेस पर अटैक कर टेरस्ट्सि ने इस धर्म को मानने वाले लोगों के साथ ही दूसरे लोगों व गवर्नमेंट को भी इस बात की चेतावनी दे डाली है कि उनकी पहुंची हर जगह है.

खुफिया तंत्र है फेल
आईबी सहित दूसरे खुफिया तंत्र स्टेट में फेल हैं. महाबोधि मंदिर में अटैक की प्रॉपर इंफॉर्मेशन के बावजूद इसे रोका नहीं जा सका. जहां तक झारखंड की बात है तो यहां का खुफिया तंत्र भी पूरी तरह से फेल है. आईबी द्वारा केवल वेग अलर्ट जारी किया जाता रहा है. यहां तो अलर्ट जारी करने का भी सीजन होता है. अक्सर आईबी द्वारा इंडिपेंडेंस डे, रिपब्लिक डे, दुर्गा पूजा सहित अन्य मौके पर अलर्ट जारी कर दिया जाता है. इस तरह के रेग्यूलर अलट्र्स के कारण पुलिस भी इसपर कोई खास ध्यान नहीं देती है. जानकारों का कहना है कि सूचना तंत्र को ज्यादा स्ट्रांग व बेहतर बनाने की जरूरत है. लास्ट इयर भोपाल एटीएस ने सिटी से इंडियन मुजाहिद्दीन के मेंबर अबू फैजल व उसकी वाइफ को अरेस्ट किया था. वे 6 महीनों से यहां रह रहे थे. अबू फैजल ने राशन कार्ड बनाने के लिए भी अप्लाई कर दिया था और यहां घर खरीदने की तैयारी में भी था, लेकिन आईबी के साथ ही लोकल पुलिस को भी इसकी भनक तक नहीं लगी. रांची व हजारीबाग से भी कई टेररिस्ट्स अरेस्ट हुए, लेकिन लोकल पुलिस व आईबी इस मामले में भी फेल साबित हुई.

खुफिया तंत्र नहीं कर रहा काम
स्टेट के फॉर्मर डीजीपी गौरीशंकर रथ कहते हैं कि टेररिस्ट्स से निपटने के लिए पुलिस के साथ ही खुफिया तंत्र को भी और एक्टिव करने की जरूरत है. फॉर्मर डीजीपी कहते हैैं कि किसी भी तरह की घटना से निपटने के लिए इम्पॉर्टेंट प्लेसेज पर सीसीटीवी कैमरा लगाने के साथ ही अवेयरनेस फैलाने की भी जरूरत है. उन्होंने कहा कि गवर्नमेंट के पास ऐसे संभावित ठिकानों की लिस्ट होगी. ऐसे में इन प्लेसेज पर विशेष निगरानी की जरूरत है.

देवघर हो सकता है निशाना
झारखंड में भी ऐसे कई प्लेसेज हैं, जहां टेररिस्ट अटैक की सिचुएशन में काफी नुकसान हो सकता है. इसके लिए स्पेशल अटेंशन की जरूरत है. फॉर्मर डीजीपी जीएस रथ का मानना है कि देवघर में श्रावणी मेला स्टार्ट होने वाला है. इन दिनों यहां काफी भीड़ होती है और किसी घटना की सूरत में काफी नुकसान हो सकता है. ऐसे में इन प्लेसेज पर चौकसी बढ़ाए जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा रेलवे स्टेशन, बस स्टैैंड सहित दूसरे पब्लिक प्लेस पर भी सिक्योरिटी अरेंजमेंट दुरुस्त करना बहुत जरूरी है.

Arrest हो चुके हैं terrorists
हजारीबाग से तौसीफ अहमद पीर, रांची से मंजर इमाम व दानिश, जमशेदपुर से सिमी व इंडियन मुजाहिद्दीन से जुड़े अबू फैजल व अन्य के अलावा सिटी से लश्कर-ए-तैयबा के मेंबर्स की भी अरेस्टिंग हो चुकी है.

चाहिए बेहतर mechanism
झारखंड के गवर्नर सैयद अहमद ने भी टेररिज्म के खात्मे के लिए प्रस्तावित नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर (एनसीटीसी) का समर्थन किया है. उन्होंने इंटरनल सिक्योरिटी के मुद्दे पर चीफ मिनस्टर्स मीट में वेडनसडे को यह बातें कही थीं. इसके जरिए सेंट्रल व स्टेट के को-ऑर्डिनेशन से आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि आतंकियों से निपटने के लिए एनसीटीसी जैसे किसी मैकेनिज्म की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा है कि स्टेट द्वारा इंटेलिजेंस को-ऑर्डिनेशन इंफ्रास्ट्रक्चर की तर्ज पर मल्टी एजेंसी सेंटर की शुरुआत की जा चुकी है.

Security arrangement दुरुस्त करने की जरूरत
वैसे तो सिटी में विभिन्न एरिया से रथयात्रा निकाली जाती है, लेकिन इस्कॉन द्वारा निकाली जाने वाली रथ यात्रा में काफी भीड़ जुटती है. ऐसे में आतंकी हमले के मद्देनजर सिक्योरिटी अरेंजमेंट भी दुरुस्त किया जा रहा है. डिस्ट्रिक्ट पुलिस द्वारा रथयात्रा के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था दुरुस्त करने की बात कही जा रही है. फॉर्मर डीजीपी गौरीशंकर रथ कहते हैं कि रथयात्रा स्टेट में पूरे धूमधाम से सेलिब्रेट की जाती है. ऐसे में इस और प्रॉपर सिक्योरिटी अरेंजमेंट की जरूरत है. वे कहते हैं, रथ यात्रा के दौरान काफी भीड़भाड़ होती है और ऐसे में किसी गड़बड़ी से निपटने के लिए पूरी तरह सिक्योरिटी अरेंजमेंट दुरुस्त करने की जरूरत है.

क्या है sleeper cell?
वैसी जगह या वैसा एरिया जहां उस वक्त टेररिज्म एक्टिव नहीं होता, लेकिन वहां की हर एक्टिविटी पर टेररिस्ट की नजर होती है. उनका काम फ्यूचर में अंजाम दी जाने वाली घटनाओं की तैयारी करना होता है. स्लीपर सेल का आतंकी एक सिक्रेट ऐजेंट के रूप में काम करता है. इसके लिए उसे स्पेशल ट्रेनिंग दी जाती है. जहां वह रहता है उस एरिया की हर एक्टिविटी, कल्चर व सोसायटी की उसे पहले से जानकारी होती है, ताकि उसे किसी तरह की कोई दिक्कत न हो. वह अपने बॉस के इंस्ट्रक्शन के आधार पर काम करता रहता है और पूरी तैयारी के बाद अचानक घटना को अंजाम दिया जाता है. स्लीपर सेल की खास बात यह होती है कि इंडिविजुअल मेंबर्स को भी एक-दूसरे के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है.

टेररिस्ट कभी भी, कहीं भी अटैक कर सकते हैं. इसके लिए खुफिया तंत्र को दुरुस्त करने की जरूरत है. टेररिस्ट्स का स्लीपर सेल तो यहां रहा ही है. ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि यहां अटैक नहीं हुआ तो, नहीं हो सकता है. संभावित प्लेसेज पर स्पेशल अटेंशन की जरूरत है.
-गौरीशंकर रथ, फॉर्मर डीजीपी, झारखंड

सिटी में सिक्योरिटी अरेंजमेंट किए जा रहे हैैं. रथ यात्रा के दौरान किसी भी घटना से निपटने की पूरी तैयारी की गई है.
-रिचर्ड लकड़ा, एसएसपी, ईस्ट सिंहभूम

Report by : goutam.ojha@inext.co.in