- सावन के पहले दिन शहर के शिव मंदिरों में उमड़ी शिव भक्तों की भीड़

GORAKHPUR: सावन शुरू होते शहर के तमाम शिव मंदिर हर-हर महादेव, ओम नम: शिवाय जैसे जयघोषों से गूंज उठे. शनिवार सुबह से मंदिरों में शुरू हुआ पूजा-अर्चना और दर्शन का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा. सिटी के महादेव झारखंडी से लेकर अन्य मंदिरों तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. दिनभर लोग भांग-धतूरा, बेलपत्र और गाय का दूध शिवलिंग पर चढ़ाते रहे. इस दौरान भीड़ को कंट्रोल करने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के जिम्मेदार भी पूरी तरह मुस्तैद रहे.

सजकर तैयार मंदिर और बाजार

शनिवार सुबह सूर्योदय बाद से ही महादेव झारखंडी, मुक्तेश्वरनाथ मंदिर व गोरखनाथ मंदिर के अलावा सभी शिवालयों में हर वर्ग के श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा. भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए भांग, धतूरा, बेलपत्र और गाय के दूध की भी जबरदस्त डिमांड रही. ठेले पर भांग, धतूरा के साथ फूल मालाएं बिकती रहीं.

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क्या है 16 सोमवार का महत्व

ज्योर्तिविद् पं. नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि सोमवार का संबंध भगवान शिव से है. सोमवार के स्वामी चंद्रमा हैं. चंद्रमा भगवान शिव के ललाट पर स्थित हैं. इसलिए सोमवार को किए हुए पूजन-अर्चन से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं. वहीं पंडित शरद चंद्र मिश्रा बताते हैं कि श्रावण के सोमवार का विशिष्ट महत्व है. इसी माह में भगवती पार्वती ने शिव जी की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या की थी. इसलिए यह महीना भगवान शिव का अत्यंत प्रिय महीना है. इस वर्ष श्रावण महीने में पड़ने वाले सोमवार क्रमश: 30 जुलाई, 6 अगस्त, 13 अगस्त और 20 अगस्त है. चारों सोमवार के दिन विशिष्ट योग बन रहा है. इस व्रत को खासतौर पर कुंवारी कन्याओं समेत शादीशुदा महिलाएं व पुरुष भी रखते हैं.