-अगले 4 माह तक कठिन साधना से गुजरेंगे पंच दिगंबर अणि अखाड़ा के वैरागी

PRAYAGRAJ: प्रयागराज में कुंभ-2019 के दौरान आश्चर्यजनक और कौतूहल भरे आयोजन रविवार को अखाड़ों में आयोजित किए गए. विशेष आकर्षण में शामिल वैष्णव संप्रदाय के दिगंबर साधुओं का धूनि अनुष्ठान शाही स्नान के बाद आरंभ हुआ तो दिनभर चलता रहा. आम बोलचाल की भाषा में धूनि रमाने का यह अनुष्ठान एक साधु के लिए वैराग्य की प्रथम प्रक्रिया हो सकती है तो वहीं गुरु के लिए यह अपने शिष्य की प्रथम परीक्षा भी. धूनि रमाने का अनुष्ठान आरंभ होने के 18 साल तक वैरागी को वर्ष में 5 माह बसंत पंचमी से अषाण माह के गंगा दशहरा तक नियमित करना होता है. एक साधक के तौर पर साधु अपनी साधना से गुरु को इस दौरान प्रभावित करता है.

हजारों साधुओं ने आरंभ किया धूनि रमाना

रविवार को शाही स्नान समापन के बाद हजारों की संख्या में श्री तेहराभाई त्यागी खालसा अखाड़ों में वैरागियों ने अपराह्न 1 बजे से धूनि रमाना आरंभ कर दिया. करीब दो घंटे तक चले इस अनुष्ठान में बैरागी अपने चारों ओर उपलों की आग जलाता है, और मुख्य गुरुस्वरूप अग्निकुंड से आग को लेकर अपने आसपास छोटे-छोटे अग्नि पिंड प्र“वलित करता है. हर अग्नि पिंड में रखी जाने वाली अग्नि को चिमटे में दबाकर वैरागी अपने ऊपर से घुमाता और फिर पिंड में रखता है. इसके साथ ही साधक पैरों पर कपड़ा डालकर गुरुमंत्र का उच्चारण करता है. बेहद गुप्त और संवेदनशील प्रक्रिया के दौरान साधक को अपने मन और तन पर नियंत्रण करना होगा है. कड़ी आग के बीच बैठकर इस अनुष्ठान को पूरा करने के पीछे न सिर्फ साधना के उद्देश्य की पूर्ति करनी होती है बल्कि साधु की क्षमता और सहनशीलता का परीक्षण भी होता है. लगातार 18 वर्ष तक साल के 5 माह इस कठोर तप के बाद साधु को वैरागी की उपाधि मिलती है. और यहां से शुरू होता है वैरागी की वैराग्य यात्रा.