- सीएम हेल्प लाइन पर हुई शिकायत, प्रिंसिपल दफ्तर की घनघनाई घंटी

- प्रिंसिपल व एसआईसी के फरमान का भी नहीं दिखा असर

GORAKHPUR: बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जिम्मेदार अफसरों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है. सिद्धार्थनगर कारागार में बंद एक कैदी का इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले आठ दिनों से चल रहा है. आज उसका अल्ट्रासाउंड जांच किया जाना था. वह सुबह से ही जांच सेंटर का चक्कर काटता रहा, लेकिन उसकी जांच नहीं हुई. इतना ही नहीं उसने इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन नंबर पर किया. शिकायत के बाद प्रिंसिपल दफ्तर में घंटी घनघनाई तो प्रिंसिपल व एसआईसी ने रेडियोलॉजी विभाग में कॉल कर फौरन जांच कराने के आदेश दिए. बावजूद रेडियोलॉजी विभाग के जिम्मेदारों पर इसका असर नहीं हुआ. वे एक बजे से सेंटर बंद कर गायब हो गए. इस वजह से कैदी की जांच नहीं हो पाई.

दर्द से परेशान कैदी ने लगाये कई चक्कर

कैदी उदय राज पिछले कई दिनों से बीमार चल रहा है. दस मार्च को बंदी रक्षक सत्येंद्र पासवान ने उसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 14 नंबर मेडिसिन इमरजेंसी बेड संख्या 26 पर भर्ती कराया. सोमवार की सुबह से कैदी के पेट में काफी दर्द होने लगा. डॉक्टर ने उसका अल्ट्रासाउंड जांच कराने की सलाह दी. इसके बाद बंदी रक्षक कैदी को लेकर रेडियोलॉजी विभाग में पहुंचा. जहां एचओडी डॉ. आरके जैन ने अल्ट्रासाउंड जांच करने से इंकार कर दिया. इसके बाद वह एसआईसी के पास पहुंचे. लेकिन एसआईसी के आदेश का भी कोई असर नहीं हुआ.

सीएमओ हेल्प लाइन पर की शिकायत

बंदी रक्षक ने कैदी का अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए परेशान होकर सीएम हेल्प लाइन नंबर पर कॉल कर शिकायत की. जिसके बाद तुरंत प्रिंसिपल के मोबाइल पर कॉल आई. उन्होंने कैदी की पर्ची पर अल्ट्रासाउंड जांच के आदेश दिए. बंदी रक्षक कैदी के साथ तीसरी बार रेडियोलॉजी विभाग पहुंचा लेकिन विभाग के सामने ताला लगा हुआ था. उसने प्रिंसिपल को इसकी जानकारी दी. बावजूद इसके जांच नहीं हुआ. जबकि कैदी के भर्ती के दौरान इमरजेंसी मेडिकल आफिसर ने पर्ची पर ओनली फॉर ट्रीटमेंट लिख दिया था.