-मॉक ड्रिल में ही फायर डिपार्टमेंट की खुली पोल

-जिला महिला अस्पताल में अग्निशमन यंत्र खराब और टैंक में नहीं मिला पानी

बरेली : ट्यूजडे को दिल्ली के करोल बाग स्थित अर्पित पैलेस होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लगने से 17 लोगों की मौत हो गई. होटल प्रबंधन की चूक का खामियाजा लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा. वहीं हादसे के फौरन बाद दिल्ली और उत्तर प्रदेश समेत सभी राज्यों में हाई अलर्ट जारी किया, लेकिन जिला प्रशासन और फायर डिपार्टमेंट के कानों में जूं तक नहीं रेंगी. कमियों को छिपाने के लिए फायर डिपार्टमेंट ने जिला अस्पताल के कुछ वार्डो का निरीक्षण और मॉक ड्रिल कर खानापूरी कर पल्ला झाड़ लिया, लेकिन जिला महिला अस्पताल में फायर डिपार्टमेंट मॉक ड्रिल में ही फेल हो गया. यहां आग बुझाने के लिए सेक्शन पाइप तो था, लेकिन यह पाइप जिस टैंक से जुड़ा था वह टैंक ही खाली पड़ा था. ऐसे हालातों से साफ पता चलता है कि अस्पताल प्रबंधन आग जैसी भयावह स्थितियों से निपटने के लिए कितना गंभीर है. इन स्थितियों में आग पर काबू पाना असंभव हो सकता है. वहीं डेंगू वार्ड के बाहर लगे सेक्सन पाइप का लॉक भी खराब था. टीम ने स्वास्थ्य कर्मियों को कड़ी फटकार लगाई और स्वास्थ्य उन्हें यंत्रों को उपयोग करने के तरीके बताए.

स्टाफ को दी ट्रेनिंग

फायर डिपार्टमेंट की टीम ने हॉस्पिटल स्टाफ को आग लगने पर फायर स्टिंगयुशर का इस्तेमाल करने का तरीका बताया. इसके अलावा आग लगने पर एडमिट मरीजों को रेस्क्यू करने का प्रदर्शन भी किया. टीम ने हॉस्पिटल स्टाफ के साथ ही अन्य लोगों को भी आग लगने पर बचाव के तरीके बाते हुए अवेयर किया.

प्रशासन की लापरवाही से होते हादसे

यह कहना गलत न होगा कि प्रशासन की लापरवाही से ही ऐसे हादसे होते हैं. कई हादसे ऐसे होते कि समय रहते उनकी भयावहता को कम किया जा सकता है, लेकिन उनसे निपटने के लिए संसाधन ही काम करना बंद कर देते हैं. अगर फायर ब्रिगेड के अधिकारी समय-समय पर होटल, अस्पताल और स्कूल आदि जगहों पर जाकर अग्निशमन यंत्रों को चेक करें तो सभी लोग ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए पहले से तैयार होंगे.

.. तो क्या सभी होटलों में व्यवस्थाएं चाकचौबंद

इतने बड़े हादसे के बाद भी फायर डिपार्टमेंट ने शहर में संचालित होटलों की व्यवस्थाओं को नहीं देखा. प्रशासन की हीलाहवाली से ही छोटे-छोटे हादसे बड़ा रूप ले लेते हैं. इससे एक सवाल यह भी उठता है कि क्या शहर में जितने भी छोटे-बड़े होटल संचालित हैं, उसमें सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं. इन सभी गंभीर बातों को जिला प्रशासन और फायर डिपार्टमेंट दोनों ही दरकिनार कर रहे हैं.

यह हैं मानक

- आबादी वाले क्षेत्र से करीब 200 मी. की दूरी पर होटल स्थापित होना चाहिए.

-रूम्स की विंडो अंदर व बाहर खुलने की व्यवस्था होनी चाहिए.

- हॉल, किचन और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर अग्निशमन यंत्र लगे होने चाहिए.

- अग्निशमन यंत्रों का समय-समय पर चेक कर रीफिल करवाना चाहिए.

वर्जन ---

समय-समय पर सरकारी विभागों समेत होटलों का निरीक्षण कर आग से निपटने की व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाता है. पूर्व में किए गए निरीक्षण में व्यवस्थाएं ठीक पाई गई थीं. जिला अस्पताल में मॉक ड्रिल भी किया गया. आगे अन्य विभागों में भी इसी प्रकार कर्मचारियों को अवेयर किया जाएगा.

सोमदत्त, एफएसओ.