- जनपद के करीब 500 परिषदीय स्कूल जूझ रहे हैं मूलभूत सुविधाओं से

- अभिभावक प्रवेश दिलाने से कर रहे हैं परहेज

आगरा. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने परिषदीय विद्यालयों की बदहाली पर जिलाधिकारी से जवाब मांगा है. जनपद भर के करीब 500 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें पानी, शौचालय और बाउंड्रीबाल नहीं हैं. जिनके कारण बाल अधिकारों का पालन नहीं हो पा रहा है. सुरक्षा की दृष्टि से सभी विद्यालयों में बाउंड्रीबाल होनी चाहिए, लेकिन नहीं है. इसके लिए कौन जिम्मेदार है. इसके लिए जिलाधिकारी को आयोग के रजिस्ट्रार ने पत्र लिखकर जवाब मांगा है.

बच्चों को क्यों नहीं मिल रहा अधिकार

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जिलाधिकारी को पत्र जारी करते हुए कहा कि आखिर बच्चों को उनका अधिकार क्यों नहीं मिल रहा है. परिषदीय विद्यालयों में सुरक्षा की भावना को देखते हुए अभिभावकों अपने बच्चों का प्रवेश दिलाने में डर रहे हैं. गांव से लेकर शहरी क्षेत्र में गरीब लोग भी निवास करते हैं. परिषदीय विद्यालयों में अधिकांश गरीब परिवार के ही बच्चे पढ़ने के लिए जाते हैं. उन्हें भी सुरक्षा और सुविधा नहीं दी जा रही है तो ऐसे में ये बच्चे कहां पर पढ़ने के लिए जाएं. जबकि केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार सर्व शिक्षा अभियान के तहत अनेक प्रकार की सुविधा देने के लिए बजट जारी करतीं हैं. बावजूद इसके न तो विद्यालयों में सुरक्षा की दृष्टि से बाउंड्रीबाल है और स्वच्छता के लिए न ही शौचालय हैं. अगर किसी विद्यालय में हैं तो वे प्रयोग के योग्य नहीं हैं. इनके साथ ही पेयजल व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है.

पानी पीने के लिए जाते हैं घर

स्कूल टाइम में अगर छात्र-छात्राओं को प्यास लगती है तो घर पर पानी पीने के लिए जाते हैं. अधिकांश विद्यालयों में पानी पीने की व्यवस्था नहीं है. जबकि शासन स्तर से जनपद में 517 हैंडपंप लगाने के लिए बजट आया था. जिनमें से आधे से ज्यादा लगे ही नहीं हैं. सीडीओ को हैंडपंप लगने की जो सूची उपलब्ध कराई गई है, उनमें से सत्यापन कराए जाने के दौरान आठ हैंडपंप मौके पर ही नहीं मिले हैं. को-ऑर्डिनेटर (वेस्टर्न यूपी) महफूज नरेश पारस ने बताया कि उन्होंने भी सूचना के अधिकार के तहत जानकारी ली थी, जिसके आधार पर आयोग ने संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया है.