कम मा‌र्क्स से न हो परेशान, पॉजिटिव सोच के साथ फिर बढ़ें आगे

अभिभावक रखें बच्चों का विशेष ख्याल, उन्हें डांटे नहीं, बल्कि प्रेरित करें

Meerut. यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के परीक्षा परिणामों में कुछ स्टूडेंट्स को मनमुताबिक नंबर नहीं मिले हैं, जिससे जिसे उनके चेहरों पर मायूसी दिख रही है. वहीं, कुछ बच्चे असफल भी हो गए, वे भी काफी निराश हैं. मनोवैज्ञानिकों की मानें तो ऐसे बच्चों को अब विशेष केयर की जरूरत है. जिस पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए.

ये अंतिम रिजल्ट नहीं

मनोवैज्ञानिक डा. विभा नागर कहती हैं कि कोई भी परिणाम अंतिम नहीं होता है. परीक्षा परिणाम देखकर बच्चों को हौसला खोने की जरूरत नहीं है. यदि बच्चा असफल हो गया है तो इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं कि वह जीवन में हार गया है. उस विषय में बच्चे की रुचि न हो या परीक्षा के समय उसकी परिस्थिति कुछ अलग रही हो. ऐसे में अब पेरेंट्स को बच्चों का विशेष ख्याल रखना चाहिए.

इन बातों का रखें ख्याल

स्टूडेंटस धीरज रखते हुए अपनी कमजोरियों को पहचाने और सकारात्मक सोच के साथ नई शुरूआत करें.

असफल होने पर बच्चों को डांटे नहीं. बल्कि सपोर्ट करें, सहारा दें और हौसला बढ़ाएं.

एकेडमिक रूप से कमजोर रहने के बावजूद अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले उदाहरणों के बारे में बताएं

बच्चों को बार-बार ताने न मारें, उन्हें हल्का फील करवाएं और खुश रखें.