यही मोबाइल का मुख्‍य आधार
जी हां नए-नए फीचर को चेक करने के ल‍िए मोबाइल की सेट‍िंग्‍स में छेड़छाड़ करना एक सामान्‍य प्रक्रिया है। इससे वे यूजर्स अपने मोबाइल के फीचर को चेक करते हैं कि‍ कौन सा फीचर कैसे काम कर रहा है। हालांक‍ि इस दौरान मोबाइल यूजर्स आईएमईआई नंबर नहीं छूना चाह‍िए। आईएमईआई यानी इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिटी नंबर हर मोबाइल में होता है। एक तरह से यही मोबाइल का मुख्‍य आधार होता है। आईएमईआई की मदद से चोरी हुआ या फ‍िर खोया हुआ मोबाइल दुन‍िया के क‍िसी भी कोने से आसानी से खोजा जा सकता है।

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फर्जी आईएमईआई नंबर के मोबाइल
वहीं आजकल कुछ लोग अनजाने में तो कुछ लोग जानबूझकर अपने आईएमईआई नंबर को बदल देते है। जबकि‍ ऐसा करना उन्‍हें भारी मुसीबत में डाल सकता है क्‍योंक‍ि अब टेलीकॉम मंत्रालय आईएमईआई नंबर की छेड़छाड़ रोकने के ल‍िए एक नया न‍ियम बना रहा है। हाल ही में टेलीकॉम इंफोर्समेंट र‍िसोर्स एंड मॉनि‍टर‍िंग ने एक र‍िपोर्ट तैयार की है। जि‍समें साफ हुआ है क‍ि देश में फर्जी आईएमईआई नंबर के मोबाइल बढ़ चुके हैं। वर्तमान में करीब 18 हजार मोबाइल ऐसे हैं जि‍नका आईएमईआई नंबर एक ही है।

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रोकने का प्रयास क‍िया जाएगा
ऐसे में अब इन्‍हें रोकने का प्रयास क‍िया जाएगा। वहीं टेलीकॉम मंत्रालय इससे पहले मोबाइल कंपन‍ियों को आदेश दे चुका है क‍ि वे भी ब‍िना आईएमईआई नंबर के मोबाइल न बनाएं। ऐसे में अब जो लोग मोबाइल में द‍िए आईएमईआई नंबर को बदलेंगे वो मुसीबत में आ सकते हैं। यहां तक की उन्‍हें तीन साल की जेल भी हो सकती है। बतादें कि‍ देश की सुरक्षा एजेंसियां भी क‍िसी भी नंबर की कॉल आद‍ि को ट्रैक करने के ल‍िए इस आईएमईआई नंबर की मदद लेती हैं। इससे वे क‍िसी भी नंबर को आसानी से ट्रैक कर लेती हैं।

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