शासन ने दी मंजूरी, मरीजों को मिलेगी सहूलियत

सिर्फ फार्मेसी पर न मिलने वाली दवाइयों को किया जा सकेगा प्रिस्क्राइब

>Meerut. सरकारी अस्पताल की डिस्पेंसरी या फार्मेसी में अगर दवाइयों की उपलब्धता नहीं है तो अब डॉक्टर मरीज को जेनेरिक दवाइयां लिख सकेंगे. जिसके तहत अस्पताल परिसर में मौजूद प्रधानमंत्री जनऔषधि केंद्रों पर मिलने वाली दवाइयों को ही प्रिस्क्राइब किया जा सकेगा. दरअसल, जेनेरिक दवाइयों को बढ़ावा देने के मद्देनजर शासन ने यह फैसला लिया है. जिला अस्पताल में एसआईसी डॉ. पीके बंसल ने बताया कि अस्पताल में लगभग सभी प्रकार की दवाइयां स्टॉक में हैं. शासन की ओर से जो भी निर्देश आएं हैं, उनका पालन किया जाएगा.

सभी दवाइयां उपलब्ध नहीं

सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली नि:शुल्क दवाइयों की सूची में 400 से अधिक दवाइयां शामिल हैं. पर ध्यान दें कि अस्पताल में मरीजों को बामुश्किल 30 से 85 दवाइयां ही मिल पाती हैं. ऐसे में आउट ऑफ स्टॉक दवाइयों को ही डॉक्टर प्रिस्क्राइब कर सकेंगे. साथ ही अस्पतालों को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि डॉक्टर, मरीज को ब्रांडेड दवा खरीदने के लिए नहीं कहेंगे सिर्फ दवा का जेनेरिक नाम ही लिखेंगे.

मरीजों को िमलेगा लाभ

डॉक्टर्स की ओर से जेनेरिक दवाइयां लिखे जाने से जहां मरीजों की जेब पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हो सकेगा. वहीं इन दवाइयों की पब्लिसिटी, पैकिंग व मार्केटिंग में खर्चा न होने की वजह से यह दवाइयां ब्रांडेड दवाइयों के मुकाबले 90 प्रतिशत से भी ज्यादा सस्ती दरों पर उपलब्ध हो जाती हैं. वहीं इन दवाइयों का कंट्रोल रेट भी सरकार ही तय करती है. इन दवाइयों की सप्लाई सरकार की ओर से ही की जाती है. सरकारी दवाइयों का स्टॉक खत्म होने पर दोबारा पहुंचने में समय लग जाता है. ऐसे में दवाओं के संकट से मरीजों को बचाने के लिए शासन ने यह निर्देश दिए हैं. जनऔषधि केंद्रों पर करीब 700 तरह की दवाइयां उपलब्ध होंगी.