DEHRADUN : उत्तराखंड मौसमी आपदाओं को देखते हुए मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को और मजबूत बनाने का प्रयास किया जा रहा है. मौसम विभाग और राज्य सरकार मिलकर इस सिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं. हालांकि मौसम विभाग के पास अब पहले से ज्यादा उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन अब भी कई बार मौसम संबंधी पूर्वानुमान फेल हो जाता है. इसके अलावा अभी तक अलग-अलग घाटियों के लिए अलग-अलग पूर्वानुमान व्यक्त करने की प्रणाली पूरी तरह से सफल नहीं है. मौसम विभाग और राज्य सरकार अगले बरसात से पहले इस सिस्टम को और मजबूत करने की तैयारी में हैं.

कई बार फेल हुआ पूर्वानुमान

इस वर्ष बरसात में हालांकि ज्यादातर मौकों पर मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही साबित हुआ है, जबकि कुछ ऐसे मौके भी आये जब पूर्वानुमान पूरी तरह फेल हुआ. एक मौका तो ऐसा भी आया जब मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी, लेकिन पूरे दिन धूप खिली रही.

डॉप्लर रडार लगेंगे

मौसम संबंधी सटीक पूर्वानुमान और सभी घाटियों के लिए अलग-अलग पूर्वानुमान सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है. ताकि जिस घाटी में अधिक बारिश की संभावना हो, वहां पहले से ही संभावित आपदा से निपटने की तैयारियां कर ली जाएं.

अब तक जिलों के अनुसार पूर्वानुमान

मौसम विभाग अभी तक राज्य के लिए कमिश्नरीवाइज या जिलावाइज ही पूर्वानुमान घोषित करता रहा है. जबकि उत्तराखंड जैसे राज्य में प्रत्येक घाटी के लिए अलग-अलग सटीक अनुमान की जरूरत होती है, ताकि संबंधित क्षेत्र में पहले से ही मुकम्मल व्यवस्था हो सके.

मानसून का अनुमान सही रहा

इस बार मौसम विभाग ने उत्तराखंड में मानसून सामान्य रहने की घोषणा की थी. यह अनुमान लगभग सही रहा है. राज्य में इस बार सामान्य से ख् प्रतिशत कम बारिश हुई है. इसे औसत बारिश की श्रेणी में रखा जाता है. चमोली जिले में सबसे ज्यादा सामान्य से ब्भ् प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पौड़ी में सामान्य से ख्म् प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई.

फ्0 सितम्बर तक बारिश

जिला बारिश प्रतिशत

अल्मोड़ा क्ब्

बागेश्वर फ्ख्

चमोली ब्भ्

चंपावत -ब्

देहरादून -भ्

पौड़ी -ख्म्

टिहरी -ख्भ्

हरिद्वार -ब्

नैनीताल ख्ख्

पिथौरागढ़ -क्ख्

रुद्रप्रयाग -क्क्

ऊधमसिंह नगर -क्भ्

उत्तरकाशी -क्7

राज्य में कई जगहों पर डॉप्लर रडार स्थापित करने का फैसला किया गया है. देहरादून में मसूरी में डॉप्लर रडार लगाने की योजना है. इसके लिए स्थान तलाश किया जा रहा है. जगह-जगह इस तरह के उपकरण लगने से मौसम में सटीक पूर्वानुमान हो सकेगा और इससे आपदा पूर्व तैयारियां करने में मदद मिलेगी.

दीपशिखा रावत, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी