फ्लैग:::-बदरा बरसे तो दो तिहाई शहर के जलमग्न होने का बड़ा खतरा

-मानसून से पहले चोक नालों को साफ करना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती

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-मानसून से पहले चोक नालों को साफ करना नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती

BAREILLY

BAREILLY :

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मानसून में शहर का दो तिहाई हिस्सा जलमग्न होने का बड़ा खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है. क्भ् जून को मानसून आने का काउंट डाउन शुरू हो चुका है और शहर के सभी 7 बड़े नाले पूरी तरह चोक हैं, जो छोटे क्0क् नाले हैं, उनमें भी फ्फ् पूरी तरह पूरी चोक हैं. इन नालों को साफ करने की कसरत नगर निगम क्भ् मई से शुरू कर सका है. ऐसे में, बड़ा सवाल है कि क्या नगर निगम मानसून आने से पहले चोक नालों को क्लीयर कर पाएगा. इस क्रम में दैनिक जागरण आईनेक्स्ट डूबेगा की बचेगा कैंपेन के जरिए आपको आपके वार्डो में चोक नालों के सच से भी अवगत कराएगा.

ालों में जमा है सिल्ट

शहर की जलनिकासी के लिए 7 बड़े नाले हैं. नगर निगम के अधिकारियों की ही मानें तो इन नालों में सिल्ट जमा है. जबकि, नाले इस तरह होने चाहिए कि उसकी तलहटी ऊपर से दिखे. नालों में गंदगी इस कदर जमा है कि आधा से ज्यादा नाले में सिल्ट भरी पड़ी है. जिसके चलते इनकी क्षमता आधी हो गई है. सिल्ट के ऊपर रही सही कसर पॉलीथिन और कचरा पूरा कर दिए हैं. स्लैब न होने की वजह से सड़क का कचरा भी नालों में लोग फेंक देते हैं. नगर निगम इस कचरे को समय-समय पर साफ नहीं कराता है, जिसके चलते आज मानसून की आहट को लेकर समस्या गहरा गई है. हालांकि, इस बार नगर निगम ने सिल्ट को साफ करने की बात कही है. अब मानसून के वक्त पता चलेगा कि सिल्ट की सफाई कितनी हो पाई है.

लो लाइन में हैं भ्भ् वार्ड

बरेली नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं. इनमें से भ्भ् वार्ड लो लाइन एरिया में आते हैं. थोड़ी भी तेज बारिश हो जाए, तो इन इलाकों में जलभराव हो जाता है. कई दिनों तक पानी जमा रहता है. जलभराव का दंश इन इलाकों की पब्लिक कई दशक से झेल रही है. वैसे तो नगर निगम हर साल करीब म्0 लाख रुपए खर्च कर नालों की सफाई का काम कराता है, लेकिन नाले की सफाई से पहले इन रुपयों की बंदरबांट हो जाती है. नतीजा, मानसून आने के बाद भी नालों की सफाई न होने के रूप में सामने आती है.

फ् नालों की सफाई का काम शुरू

बड़े नालों की सफाई इस बार नगर निगम टेंडर पर करा रहा है. छोटे नालों की सफाई खुद करेगा. इस क्रम में तीन बड़े नालों की सफाई का काम भी शुरू हो गया है. हालांकि, नगर निगम के समक्ष नालों की टूटी दीवार एक बड़ी चुनौती बनने वाली है. क्योंकि अतिक्रमण हटाओ अभियान में तोड़फोड़ के वक्त नालों की दीवार टूट गई है. ऐसे में, उसे बिना देर किए बनाना भी होगा. क्योंकि यदि इन नालों की दीवारों की समय से मरम्मत नहीं हुई, तो भी दिक्कत होना तय है. इन नालों में बड़ी मात्रा में ईट-सीमेंट का मलबा भ्ाी भरा पड़ा है.

इस एरिया में होता है जलभराव

सुभाषनगर, कटरा चांद खां, नवादा शेखान, नवादा जोगियान, फाल्तूनगंज, सिकलापुर, आंशिक मॉडल टाउन, एजाजनगर, पुराना शहर, आंशिक रामपुर गार्डन, इंग्लिशगंज, राजेंद्र नगर, नगर आयुक्त आवास और मेयर कैंप ऑफिस, फायर ब्रिगेड आफिस, एसएसपी आफिस, समेत कई सरकारी आवास भी डूब जाते हैं.

फैक्ट्स एंड फिगर

-बरेली नगर निगम में 80 वार्ड

-भ्भ् वार्डो में जलभराव की समस्या

-क्08 नाले से होती है जल निकासी

- ब्0 नालों चोक होने की पुष्टि

-सफाई को म्0 लाख रुपए का बजट

-7 जेसीबी, फ् छोटी मशीन, और पोक मशीन

शहर के सभी बड़े नाले चोक है. सिल्ट जमा होने की वजह से नालों की तलहटी नहीं दिखती है. इस बार तल तक सफाई का काम कराया जा रहा है. सिल्ट साफ हो जाएगी, तो 7-8 महीने के लिए समस्या दूर हो जाएगी. नालों की सफाई एक माह में पूरी करने का समय कंपनी को दिया गया है.

राजेश कुमार श्रीवास्तव, नगर आयुक्त बरेली