आगरा। भीषण गर्मी और तापमान 44 डिग्री के करीब। चिलचिलाती गर्मी के बीच विवि में पानी के लिए भटकते स्टूडेंट्स। पानी की कोई व्यवस्था नहीं और परीक्षा विभाग के पास लीकेज पाइपलाइन से बह रहा लाखों लीटर पानी नाली में। यह नजारा गुरुवार को विवि परिसर में देखने को मिला। आगरा का विश्वविद्यालय अपनी कारगुजारियों के लिए जगजाहिर है। हजारों स्टूडेंट्स प्रतिदिन यहां अपनी शिकायतों और समस्याओं को लेकर आते हैं। घंटों परिसर में बिताने पड़ते हैं लेकिन उनके लिए कोई सुविधाएं नहीं हैं। पीने के पानी तक के लिए स्टूडेंट्स भटकते रहते हैं। विभागों या परिसर में लगे वाटर प्वाइंट खराब पड़े हुए हैं। मजबूरन स्टूडेंट्स को अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी की कीमत अदा करनी पड़ती है।

पाइप लाइनों बह गया लाखों लीटर पेयजल

भीषण गर्मी में विश्वविद्यालय के पॉलीवाल पार्क कैम्पस में आने वाले स्टूडेंट्स पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं। पेयजल की टंकी में लगी चार इंच की पाइप लाइन टूटी पड़ी है, जिससे लाखों लीटर पानी नाली में बह गया। विभागों के बाहर लगे वाटर कूलर खराब हैं। परीक्षा विभाग के पास बने क्षतिग्रस्त शौचालयों में भी पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। गुरुवार को जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी यहां से गुजरे तो जरूर लेकिन उन्होंने पानी की बर्बादी को पूरी तरह से अनदेखा कर दिया।

मजबूरन खरीद रहे पानी की बोतल

विश्वविद्यालय परिसर में स्टूडेंट्स के लिए शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था न होने के कारण उन्हें बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है। दूर-दराज से आने वाले स्टूडेंट्स को बाहर लगी ठेलों से पानी की बोतल, शिकंजी खरीदनी पड़ रही है, जिसकी कीमत 15 से 20 रूपए तक है। वहीं कुछ स्थानीय कर्मचारियों का कहना था कि बाहर के लोग निजी लाभ के लिए परिसर में पेयजल व्यवस्था को ध्वस्त कर देते हैं।

नहीं उठा कुलपति का फोन

परीक्षा विभाग के पास खुली जगह है, जहां से क्षतिग्रस्त पाइप लाइनों से लाखों लीटर शुद्ध पेयजल दूसरी मंजिल से नीचे गिर रहा था। वहां गुजर रहे कर्मचारी और अधिकारियों ने अव्यवस्था को ठीक करने में कोई सक्रियता नहीं दिखाई। इस संबंध में कुछ लोगों ने कुलपति डॉ। अरविन्द दीक्षित से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

परिसर में आते हैं हजारों स्टूडेंट्स

विवि में रोजाना हजारों स्टूडेंट्स दूर-दराज से समस्या लेकर आते हैं। इनके लिए विवि के पास पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। इनके अलावा आवासीय संस्थानों में करीब बीस हजार स्टूडेंट्स हैं, जिनमें से कुछ स्टूडेंट्स किसी ना किसी कार्य से पालीवाल पार्क कै म्पस आते हैं। पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से वह परिसर में भटकते देखे जा सकते हैं।

परिसर में स्टूडेंट्स के लिए पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं हैं, जबकि कर्मचारियों के लिए पानी का कैम्पर मंगाया जाता है।

अपूर्व, छात्र

सुबह करीब ग्यारह बजे एलएलबी सैक्शन में एप्लीकेशन देने आया था, पिछले दो घंटे से टहलाया जा रहा है। पानी ढूंढा लेकिन वाटर प्वाइंट खराब मिले।

निहाल सिंह मीणा, छात्र

परिसर में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। हैंडवॉश के लिए कैंटीन में जाना पड़ता है। प्यास बुझाने के लिए पाउच या बोतल खरीदनी पड़ती है।

गौरव झा, छात्र