सेंसर और कैमरा से होंगी हैंडल
बिना ड्राइवर वाली ये कारें सेंसर्स और कैमरा सिस्टम के जरिए ही चलती हैं. इन्हें सामान्य कारों के मुकाबले अधिक सेफ और बेहतर माना जाता है. ये कारें सेफ चलने के लिए ट्रैफिक के माहौल के बारे में अपने सेंस का यूज करती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक यह कारें ड्राइवर के बिना ही आगे चल रहे वाहनों से उचित दूरी बनाए रखती हैं और अपने लेन से बाहर नहीं निकलती हैं. फिलहाल इन कारों को रूरल और सेमी अर्बन एरियाज में सेमी-आटो मोड में चलाया जाएगा.

ब्लू प्रिंट भी तैयार

बताया जा रहा है कि टेस्टिंग के दौरान सेफ्टी को लेकर एक ड्राइवर कार में ही रहेगा जो कि किसी इमरजेंसी की कंडीशन में कार को कंट्रोल कर सकेगा. यानि कार में सवार पैसेंजर्स के पास कार की कंट्रोलिंग अपने हाथ में लेने का ऑप्शन भी होगा. इस योजना के ब्लूप्रिंट को ब्रिटेन के ट्रैफिक डिपार्टमेंट ने जारी किया है. यह डिपार्टमेंट सडक़ों पर भीड़ कम करने केलिए 28 अरब पाउंड खर्च कर रहा है. जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि ये ड्राइवरलेस कारें अपने आप चलने में सक्षम हैं.

रोमांचित हैं एक्सपट्र्स

इन कारों की टेस्टिंग ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की टीम करेगी. यह टीम ड्राइवर लेस कार की टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट पर काम कर रही है और ऑक्सफोर्ड साइंस पार्क के पास परिवर्तित निसान लीफ कारों पर टेस्ट कर रही है. इस टेक्नोलॉजी में रास्तों को याद करने के लिए लेजर और छोटे कैमरों का यूज किया जाता है. कार अपने रास्ते को याद कर लेती है. ऑक्सफोर्ड टीम का नेतृत्व कर रहे प्रोफेसर पॉल न्यूमैन ने कहा कि हम पब्लिक रोड्स पर कार की टेस्टिंग को लेकर उत्साहित हैं. इस योजना पर काम करना रोमांचकारी है.

आगे आया गूगल
एक्सपट्र्स का कहना है कि इसमें हम इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर टेक्नोलॉजी का यूज कर रहे हैं. ब्रिटिश सरकार को भी लगता है कि इंजीनियरिंग महत्वपूर्ण हैं. प्राइवेट सेक्टर में इस टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की अगुवाई इंटरनेट कंपनी गूगल कर रही है. गूगल ने एक परिवर्तित टोयेटा पायरस कार से सार्वजनिक सडक़ों पर तीन लाख मील का सफर तय किया है. गूगल के को-फाउंडर सर्जे ब्रिन को विश्वास है कि ड्राइवर लेस कार जीवन के स्तर को और ऊपर उठा देगी. उन्हें लगता है कि यह कार एक दशक के अंदर बाजार में मिलने लगेगी. प्रोफेसर न्यूमैन स्वीकार करते हैं कि गूगल इस मामले में आगे रहा है लेकिन वह यह भी कहते हैं कि अब गूगल मैदान में अकेला नहीं है.

तो और यूज होंगी कारें
अभी तक टेक्नोलॉजी को कार के मौजूदा मॉडलों पर ही टेस्ट किया गया है लेकिन फोर्ड, ऑडी और वोल्वो जैसी कंपनियों ने टेक्नोलॉजी की लागत कम होने पर नई कारें इजाद करने में रुची दिखाई है. यदि इन कंपनियों ने ड्राइवर लेस कारें बनाई तो निश्चित रूप से इनका यूज बढ़ेगा. हालांकि इंश्योरेंस कंपनी ‘एए’ के रोड पॉलिसी डिपार्टमेंट के चीफ पॉल वाटर्स सावधानी बरतने पर जोर देते हैं. उन्होंने बताया कि अतीत में हमारे सदस्यों ने फुली आटोमेटिक् कारों के प्रति चिंता जाहिर की है और मेन ऑपरेटेड कारों को तरजीह दी है.

अभी बहुत समय है
एक्सपट्र्स कहते हैं कि कॉफी पीते हुए न्यूजपेपर पढऩा अभी दूर की कौड़ी है. यह टेक्नोलॉजी अभी शुरुआती दौर में है. ड्राइवरलेस कारें लंबे  समय तक मुख्यधारा में नहीं आ पाएंगी. आज की कार पहले से ही गाइडेड पार्किंग, और क्रूज कंट्रोल जैसी मार्डन टेक्नोलॉजीं से लैस है. इसलिए पूरी तरह से ड्राइवर लेस कार विकास की इस प्रक्रिया का नतीजा होगी न कि एक रात के अंदर हुआ चमत्कार.