- 68532.78 हेक्टेयर मीटर शहर में भूगर्भ जल का स्तर

- 10635.96 हेक्टेयर मीटर भूगर्भ जल की उपलब्धता

- 46 लाख कुल पॉपुलेशन

- 600 मिलियन लीटर रोजाना डिमांड

- 550 मिलियन लीटर रोजाना आपूर्ति

- 500-600 लीटर रोजाना हर व्यक्ति को जरूरत

- किसी इलाके में 60 सेमी. तो कहीं 1.5 मीटर तक गिरा जलस्तर

- पानी की बर्बादी और बढ़ती डिमांड बनी गिरावट की मुख्य वजह

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LUCKNOW: भले ही राजधानी का शहरी क्षेत्र अभी केपटाउन न बना हो, लेकिन वह दिन दूर नहीं, जब हम आप भी लंबी लाइन में खड़े होकर पानी खरीदने के लिए मजबूर होंगे. इसकी वजह यह है कि राजधानी के शहरी क्षेत्र में हर साल भूगर्भ जलस्तर तेजी से घट रहा है. भूगर्भ जल विभाग के आंकड़ों की मानें तो हर साल 60 से 65 सेमी. की गिरावट दर्ज की जा रही है. इससे खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि 20 से 25 साल बाद कितनी भयावह स्थिति सामने आने वाली है. वहीं जानकारों की मानें तो आज से आठ से दस साल पहले पांच से सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जाती थी. तेजी से गिर रहे जलस्तर की प्रमुख वजह पानी की बर्बादी और बढ़ती पानी की डिमांड है.

एक मीटर तक घटा जलस्तर

शहर के कई इलाकों में जहां 50 से 60 सेमी. तक जलस्तर गिर रहा है, वहीं दो इलाके तो ऐसे हैं, जहां हर साल जलस्तर 1 से 1.5 मीटर तक गिर रहा है. इसकी वजह से इन इलाकों में रहने वाले लोगों को जलसंकट का सामना करना पड़ता है.

यहां एक मीटर तक घटा जलस्तर (प्री मानसून)

इलाका घटा जलस्तर (मी.)

जेलरोड 1.71

टूडि़यागंज 1.38

घटता जलस्तर अन्य इलाकों में

इलाके घटता जलस्तर (सेमी.)

एयरपोर्ट 0.22

अमराई 0.03

कैंट सदर 0.48

दीनदयाल नगर 0.73

फैजुल्लागंज 0.17

आलमबाग 0.74

सीतापुर रोड 0.62

जलालपुर क्रॉसिंग 0.84

कुकरैल फॉरेस्ट 0.34

लालकुर्ती 0.67

लामार्ट 0.64

लालबाग 0.72

माधोपुर 0.67

महानगर 0.52

नौबस्ता 0.50

चिनहट 0.58

पुरनिया 0.76

अलीगंज 0.59

त्रिवेणीनगर 0.82

(ये सभी आंकड़े प्रतिवर्ष प्री मानसून के हैं.)

एक भी इलाका नहीं, जहां बढ़ा हो जलस्तर

आंकड़ों में गौर फरमाए तो एक बात साफ है कि शहर का कोई भी एक इलाका ऐसा नहीं है, जहां भूगर्भ जलस्तर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई हो. सभी इलाकों में हर साल गिरावट दर्ज की जा रही है. अलीगंज, आलमबाग, एयरपोर्ट, हजरतगंज समेत कई पॉश इलाकों में भी जलस्तर के गिरने का आंकड़ा बढ़ रहा है.

हर जोन में घटा 2 से 3 फीट पानी

भूगर्भ जल विभाग के साथ-साथ अब अगर जलकल के आंकड़ों पर गौर फरमाए तो जलसंकट की भयावहता और भी अधिक आसानी से समझ में आ सकती है. शहर में जलकल के आठ जोन हैं. हर एक जोन में हर साल 2 से 3 फीट पानी गिर रहा है. जिसकी वजह से हर साल 50 से अधिक सबमर्सिबल जवाब दे रहे हैं, जबकि हजारों हैंडपंप इतिहास बन चुके हैं.

आइए जानते हैं जलकल के जोनवार पानी स्तर गिरावट के आंकड़ें...

जोन वर्तमान जलस्तर (फीट में) दस साल पहले स्थिति (फीट में)

1 180-200 140-150

2 120 80

3 150 120-125

4 140-150 120-125

5 155 130-135

6 130 115-120

7 160 140

8 125-135 55-60

गिरते जलस्तर की मुख्य वजह बढ़ती डिमांड

जिस रफ्तार से पानी का स्तर गिर रहा है, उसकी प्रमुख वजह बढ़ती डिमांड है. करीब दस साल पहले तक जहां हर व्यक्ति को औसतन 200 लीटर पानी की जरूरत होती थी, वहीं अब यह आंकड़ा 600 के पार पहुंच चुका है. इसी तरह पानी की बर्बादी भी गिरते जलस्तर की दूसरी प्रमुख वजह है.

पानी की आपूर्ति पर सबमर्सिबल भारी

जलकल की ओर से अपने सभी आठ जोन में नियमित रूप से सुबह और शाम जलापूर्ति की जाती है. इसके बावजूद लोगों की पानी की डिमांड पूरी नहीं हो पाती है. आलम यह है कि अपनी पानी की मांग पूरी करने के लिए हर दूसरे घर में सबमर्सिबल लगा नजर आता है. जिसकी वजह से भूगर्भ जल का दोहन और तेजी से हो रहा है. आठ से दस साल पहले की बात की जाए तो एक मोहल्ले में किसी एक या दो घर में सबमर्सिबल लगा होता था, लेकिन अब तो लगभग हर दूसरे घर में सबमर्सिबल लगा हुआ है.

संसाधन एक नजर में

-121 कुल ओवरहैड टैेंक

-30 से 35 अंडरग्राउंड जलाशय

-670 ट्यूबवेल

-22 हजार कुल हैंडपंप

डेली डिमांड 600 मिलियन लीटर

जानकारी के अनुसार, शहर में प्रतिदिन पानी की डिमांड 600 मिलियन लीटर तक पहुंच गई है. जबकि चार साल पहले यह 400 मिलियन लीटर और आठ से दस साल पहले 150 से 200 मिलियन लीटर के आसपास थी.

फैक्ट फाइल

-3 लाख 40 हजार करीब कुल नल कनेक्शनधारी

-3 हजार किमी शहर में पेयजल लाइन बिछी

वर्जन

यह बात सही है कि शहरी क्षेत्र में औसतन हर साल 60 से 65 सेमी. भूगर्भ जल का स्तर गिर रहा है. जो निश्चित रूप से चिंता का विषय है. बढ़ती पानी की डिमांड और पानी की बर्बादी को गिरते जलस्तर की प्रमुख वजह माना जा सकता है. अभी से हम सभी को एलर्ट होना होगा, अन्यथा आने वाले दिनों में स्थिति और भी खराब हो सकती है.

वीके उपाध्याय, डायरेक्टर, भूगर्भ जल विभाग