क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : यह रिम्स है! यहां नियम-कायदे, दिशा निर्देश और गाइडलाइंस को दरकिनार कर देना आम बात है. इन दिनों जहां स्वच्छता अभियान न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे देश में जोरशोर से चलाया जा रहा है, वहीं रिम्स परिसर में खुलेआम इसकी धज्जियां उड़ाई जा रही है. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हॉस्पिटल के ओपीडी, हॉस्टल और डॉक्टर्स कॉलोनी में कूड़े-कचरे को रखने के लिए एक भी डस्टबिन नहीं है. ऐसे में लोग जहां-तहां कचरा फेंक दे रहे है. कचरा उठाव नहीं होने के कारण अब कैंपस में ही बीमारी फैलने का डर सता रहा है. इसके बावजूद रिम्स प्रबंधन मामले को लेकर गंभीर नहीं है.

सुझावों को किया इग्नोर

रिम्स कैंपस का इंस्पेक्शन के दौरान हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम को भी कहीं डस्टबिन नहीं दिखा था. ऐसे में टीम ने प्रबंधन को डस्टबिन लगवाने की सलाह दी है. साथ ही कहा कि डस्टबिन नहीं रहने की वजह से जहां-तहां कचरा फेंक दिया जाता है. इस वजह सें जमा पानी में मच्छर पनप रहे है. अगर डस्टबिन होगा तो कचरा उसमें डाला जाएगा. ऐसे में रेगुलर सफाई भी हो जाएगी तो मच्छर नहीं पनपेंगे.

टेंपररी डंपिंग यार्ड में कचरा

हॉस्पिटल में कई जगह पर खुले में कचरा फेंका जाता है. वहीं, हॉस्टल और किचन के बीच में भी टेंपररी डंपिंग यार्ड बना दिया गया है. इस वजह से मरीजों के साथ ही डॉक्टरों और नर्सो को भी बीमार होने का खतरा मंडरा रहा है. गंदगी की वजह से मच्छर का भी आतंक यहां देखने को मिल रहा है. डॉक्टर्स कॉलोनी में भी डस्टबिन नहीं होने से हमेशा गंदगी का अंबार लगा है.

ओपीडी में भी बिखरा रहता है कचरा

ओपीडी कांप्लेक्स में हर दिन हजारों मरीज आते है. लेकिन पूरे ओपीडी कांप्लेक्स में कहीं भी डस्टबिन नहीं लगा है. इस वजह से मरीज और उनके परिजन चीजों को जहां-तहां फेंक देते है. जिससे कि कचरा बिखरा पड़ा रहता है. ऐसे में कचरे का उठाव होने तक लोगों को भी गंदगी के बीच ही रहना पड़ता है.