-कम्प्यूटराइज्ड बिल के लिए जल्द ही जारी होगा नोटिफिकेशन

-जीएसटी में रजिस्टर्ड व्यापारियों को देना होगा कम्प्यूटराइज्ड बिल

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PRAYAGRAJ: जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स कलेक्शन के साथ-साथ टैक्स चोरी भी बढ़ गई है। इसे रोकने के लिए अब जीएसटी काउंसिल ई-इनवॉयस सिस्टम लागू करने जा रहा है। इसके तहत जीएसटी में रजिस्टर्ड कारोबारियों व व्यापारियों को प्रत्येक सेल-परचेज के लिए ई-इनवॉयस निकालना होगा। एक निश्चित सीमा से अधिक टर्नओवर करने वालों को हर इलेक्ट्रॉनिक इनवॉयस (ई-इनवॉयस) पर एक खास नंबर मिलेगा। इसका सेल्स रिटर्न में दर्शाए इनवॉयस और चुकाए टैक्स से मिलान किया जा सकेगा।

दिया जाएगा सॉफ्टवेयर

नई व्यवस्था के तहत कारोबारियों व कंपनियों को जीएसटी द्वारा सॉफ्टवेयर दिया जाएगा। यह जीएसटी या सरकारी पोर्टल से जुड़ा होगा। इससे ई-इनवॉयस निकाला जा सकेगा। इनवॉयस को टर्नओवर के हिसाब से लागू करना जरूरी किया जाएगा, ताकि बिल में छेड़छाड़ न की जाए। ई-इनवॉइस निकालने की अनिवार्यता रजिस्टर्ड कारोबारी के टर्नओवर या इनवॉइस के मूल्य के आधार पर तय की जा सकती है। ताकि टैक्स बचाने के लिए कंपनियां बिल को अलग-अलग बांटकर न दिखाएं। ई-इनवॉयस जेनरेट करने का तरीका ई-वे बिल की तरह होगा।

लागू होगा प्रस्तावित ई-इनवॉयस सिस्टम

ई-इनवॉयस का प्रस्तावित सिस्टम आने वाले समय में ई-वे बिल सिस्टम की जगह ले लेगा क्योंकि ई-इनवॉयस सरकार के केंन्द्रीयकृत पोर्टल से ही निकलेंगे। फिलहाल 50,000 रुपए से अधिक मूल्य के सामान की आवाजाही के लिए ई-वे बिल निकालने की जरूरत होती है।

रिटर्न भरने में सहूलियत होगी

ई-टैक्स इनवॉयस बनाने की व्यवस्था शुरू होने पर बड़े कारोबारियों व कंपनियों के लिए रिटर्न भरने के बोझ में काफी कमी आएगी। क्योंकि रिटर्न फॉर्म में इनवॉयस से संबंधित डेटा अपने-आप दिखाई देगा, जिसका मिलान आसान होगा।

वर्जन-

जीएसटी लागू होने के बाद टैक्स चोरी रोकने के लिए ई-वे बिल लागू किया गया था। इसके बाद भी कारोबारियों व कंपनियों ने खेल करना शुरू कर दिया। इस पर रोक लगाने के लिए ई-इनवॉयस सिस्टम की प्रक्रिया जल्द ही लागू होने वाली है। जिसकी तैयारी शुरू हो गई है।

राम प्रसाद

एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2