क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : अब पासपोर्ट वैरीफिकेशन के लिए आवेदकों को थानों की बार-बार दौड़ नहीं लगानी होगी. इससे जुड़े आवेदन लंबित नहीं रहें, इसके लिए थानों को ई-पुलिस वैरीफिकेशन से जोड़ा जा रहा है. पहले चरण में कोतवाली, अरगोड़ा, बरियातु, सदर और डोरंडा थाना को ई-पुलिस वेरिफिकेशन से जोड़ा जा रहा है. इसके बाद चरणबद्ध तरीके से जिले के सभी थानों को इससे कनेक्ट करने की योजना है. गौरतलब है कि दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में पासपोर्ट वैरीफिकेशन में राज्य के फिसड्डी होने की खबर छपने के नाम पर रांची पुलिस जागी है. एसएसपी अनीश गुप्ता के निर्देश पर छह माह से लंबित ई-पुलिस वैरीफिकेशन सिस्टम लागू करने की कवायद हो रही है.

तीन बिंदुओं पर होती जांच

पासपोर्ट वैरीफिकेशन से जुड़े आवेदनों पर थाने के स्तर पर सिर्फ तीन बिंदुओं की जांच की जाती है. आवेदक भारतीय है अथवा नहीं, आवेदक के खिलाफ थाने में कोई आपराधिक मामला दर्ज है या नहीं और वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा तो नहीं है, इसकी ही जांच पुलिस करती है. इसी के आधार पर आवेदकों को पासपोर्ट इश्यू किया जाता है. लेकिन, थाने स्तर पर पासपोर्ट वैरीफिकेशन के एक-एक मामले की जांच में पुलिस को तीन-तीन माह लग जा रहे हैं.

नहीं लंबित रहेंगे वैरीफिकेशन के आवेदन

ई-पुलिस वैरीफिकेशन सर्विस शुरू होने के बाद जांच में ज्यादा समय लगने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी. उम्मीद जताई जा रही है कि तीन दिनों के अंदर पासपोर्ट वैरीफिकेशन का काम निपट जाएगा. मालूम हो कि वैरीफिकेशन में समय लगने से पासपोर्ट जारी करने के कई आवेदन लंबित हो जाते हैं, जिस कारण आवेदकों को समय पर पासपोर्ट इश्यू नहीं हो पाता है.

क्या है ई-पुलिस वैरीफिकेशन

ई-पुलिस वैरीफिकेशन की प्रक्रिया में आवेदक के द्वारा सूचना मिलने पर स्वयं थाना में उपस्थित होकर अपने सारे दस्तावेजों को उपलब्ध कराया जाता है. पुलिसकर्मी इसे ऑनलाइन अपडेट करते हुए आवेदक का डिजिटल सिग्नेचर लेकर उसे सिस्टम पर लोड कर देते हैं. आवेदक द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी को डाटाबेस से मिलान करने के बाद महज दो दिनों के भीतर जांच कर रिपोर्ट जारी कर दी जाती है.

हर साल 1.5 करोड़ का करती पेमेंट

पुलिस विभाग को पासपोर्ट ऑफिस के द्वारा हर साल तकरीबन 1.5 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता है. पासपोर्ट हेतु पुलिस वैरीफिकेशन के लिए प्रति पासपोर्ट 150 रुपये पेमेंट का प्रावधान है. आंकड़े बताते हैं कि हर साल 1 लाख पासपोर्ट औसतन निर्गत किये जाते हैं.

आवेदकों को होंगे ये फायदे

-जांच का स्टेटस पता रहेगा

-हस्ताक्षर के बेस्ड ही रिपोर्ट तैयार होगी

-समय और खर्च कम होगा

-मैन पावर की नहीं रहेगी समस्या

-अवैध वसूली नहीं हो पाएगी