संडे की शाम को आए भूकंप ने पूरे नार्थ इंडिया को हिला कर रख दिया. देश की राजधानी दिल्ली में भी इमारतें हिलीं और सभी के मन में फिर से आए एक भूकम्प की दहशत भर गई. रिएक्टर स्केल पर 6.8 की इन्‍टेन्सिटी से आए इस अर्थक्वैक का इपीसेंटर सिक्किम का मंगन टाउन था जिसके बारे में लोगों को काफी कम पता है.

delhi को हिलाया बड़ी-इलायची की world capital नें

मंगन सिक्किम की कैपिटल गंगटोक से 64 किलोमीटर की दूरी पर एक बेहर सुन्दर टाउन है. अधिकतर समय बर्फ की पहाड़ियों से घिरा रहने वाला यह छोटा सा कस्बा नार्थ सिक्किम जिले का हेडक्वार्टर भी है. मंगन समुद्र तल से 956 मीटर की ऊंचाई पर बसा है और टूरिज्म के नजरिये से सिक्किम का इंपार्टैन्ट प्वाइंट है.

बड़ी इलायची की वर्ल्ड कैपिटल कहलाने वाला मंगन अपनी नेचुरल ब्यूटी के लिये हमेशा ही टूरिस्ट की प्रायारिटी लिस्ट में रहता है. चार जिलों में डिवाइडेड सिक्किम स्टेट के नार्थ सिक्किम जिले का अधिकतर हिस्सा टूरिस्ट के लिए रिस्ट्रिक्ट्रेड है, क्योंकि इस सेंसिटिव डिस्ट्रिक की सीमा चीन से मिलती है. सिक्किम आने वाले अधिकतर टूरिस्ट मंगन धूमना बेहद पसंद करते हैं. कैपिटल गंगटोक से रोड की अच्छी कनेक्टिविटी की वजह से भी लोग इस टाउन को आसानी से विजिट कर लेते हैं.

मंगन की दो तिहाई पापुलेशन नेपाली कम्युनिटी को बिलांग करती है और हिन्दू धर्म को फालो करती है जबकि बाकी लोग बौद्ध हैं. नवीं सेंचुरी में गुरू रिन्पोचे ने यहां बौद्ध घर्म को पापुलर किया था. एक समय यह टाउन तिब्बत प्लैटियू का इंट्रेंस प्‍वाइंट हुआ करता था. आजादी के बाद सिक्किम के इंडिया से जुड़ने के साथ ही यह टाउन इडिया का हिस्सा बन गया.

इंट्रस्टिंग बात है कि मंगन के लोग ट्रडीशन और कस्टम्स को काफी हद तक फालो करते हैं. यहां की लेप्चा कम्युनिटी के लोग आज भी बीमारी के इलाज के लिये इविल्स और स्पिरिट्स पर भरोसा करते हैं.

अर्थक्वैक आने से पहले मंगन को केवल वही लोग जानते थे जो नार्थ ईस्ट को घूमना पसंद करते हैं. पिछले 77 सालों में आए सबसे तेज अर्थक्वैक का इपीसेंटर होने की वजह से अब सभी पूछ रहे हैं कि आखिर मंगन है कहां?

देखिये मंगन की कुछ तस्वीरें-

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