-- BHU पहुंचे भूकंप एक्सपर्ट ने मीडिया को दी जानकारी

- कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए लाइसेंस सिस्टम स्टार्ट करने को बताया जरूरी

VARANASI:

नेपाल में भूकंप के बाद की स्थिति का जायजा लेकर समरसता वर्कशॉप में पार्टिसिपेट करने बीएचयू पहुंचे आईआईटी हैदराबाद के भूकंप विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप कुमार शुक्रवार को मीडिया से रू-ब-रू थे. डॉ. प्रदीप ने कहा कि बिल्डिंग बनवाने वाले इंजीनियर्स की जवाबदेही तय होनी चाहिए और कॉन्ट्रैक्टर के लिए लाइसेंस सिस्टम स्टार्ट किया जाना चाहिए. कहा कि नेपाल में लगभग ख्.भ् लाख बिल्डिंग जमींदोज हुई और लगभग इतनी ही क्षतिग्रस्त भी. कहा कि भूकंप रोक पाना किसी के वश में नहीं और न ही ऐसी कोई टेक्निक है जिससे भविष्यवाणी की जा सके. अनिश्चय की स्थिति में ऐसी बिल्डिंग्स बनानी होंगी जो कि भूकंपरोधी हों.

हिमालय क्षेत्र है संवेदनशील

कहा कि हिमालय क्षेत्र में भूकंप का अंदेशा बना रहता है. नौ से क्ब् मई तक उन्होंने नेपाल का दौरा किया था. भारत में कश्मीर, हिमाचल, उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और पूर्वी भारत के अन्य राज्य हिमालय क्षेत्र में आते हैं. कहा कि बचाव के लिए अवेयरनेस जरूरी है. वाराणसी तीन, चार व पांच जोन में आता है. यहां तक पहुंचते-पहुंचते भूकंप की तीव्रता कम हो जाती है.

बनाया है बिल्डिंग का मॉडल

बताया कि बिल्डिंग की मजबूती जांचने के लिए मॉडल बनाया है. इससे बताया जा सकता है कि भूकंप आने पर मकान की स्थिति क्या रहेगी. मॉडल बनाने में गुजरात में ख्0 हजार, महाराष्ट्र में पांच हजार, हिमाचल में क्0 हजार व अन्य स्टेट्स में पांच हजार मकानों का सर्वे किया गया और आंकड़ों को कंप्यूटरीकृत मॉडल से जांचा गया. इस मौके पर डॉयरेक्टर प्रो. राजीव संगल भी प्रेजेंट रहे.