-मन का डर हर वक्त बेवजह करता है परेशान

-चिंता रोग से ग्रस्त लोग हमेशा डरते रहते हैं

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PATNA: पिछले कुछ दिनों से भूकंप ने जितना नुकसान नहीं किया है, उससे बहुत अधिक परेशान किया है इसकी दहशत ने. दहशत भी ऐसी कि घर से लोग बाहर निकल कर पार्क या मैदान में चले जाते हैं, तो कभी मॉल या शॉपिंग काम्पलेक्श भी जाते हैं. रुक कर बाहर से उसे निहारने लगते हैं. ह्यूमन बॉडी तो इस पर बाद में रिएक्ट करता है, लेकिन इसे किसी का मन किस प्रकार से लेता है, यह उससे निपटने या हार जाने की बात होती है. मनोवैज्ञानिक डॉ विनय कुमार कहते हैं कि भूकंप आने पर हर किसी के मन पर चोट पहुंचती है. भागने और अपनी-अपनी जगह पर स्थिर रहने दोनों ही दशा में जीवन की सुरक्षा का भाव है.

परेशानी एक, सोच तीन

डॉ विनय कुमार के मुताबिक इसमें मनोवैज्ञानिक स्तर पर तीन प्रकार के लोग हैं. एक वे जिनमें ऐसी घटना के बाद भी उनकी स्मृति में ये जिंदा रहती है. इसे पोस्ट ट्रोमैटिक स्ट्रेस डिस्ऑर्डर कहा जाता है. इसमें घटना के तुरंत बाद की स्थिति रहती है. दूसरे वैसे लोग हैं चिंता रोग से ग्रस्त हैं. ये वैसे लोग हैं जो घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी चिंता में रहते है और मन में डर पाले रहते हैं, जबकि तीसरे वे लोग हैं जो समझदारी से काम लेते हैं और तार्किक रूप से सोचते-समझते हैं. ये अनावश्यक रूप से डरने की बजाय इसे सहज रूप से लेते हैं. जैसे अगर जानकारी मिली कि भूकंप का केंद्र नेपाल था और वे पटना में हैं, तो स्वभाविक रूप से यहां पर उसका कंपन महसूस होगा.

बॉडी का फाइट ऑर फ्लाइट

ह्यूमन बॉडी में एक हारमोन पाया जाता है, जिसे एड्रेनिल कहा जाता है. इसे फाइट ऑर फ्लाइट के लिए प्रेरित करने वाला हारमोन कहा जाता है. किसी अनहोनी या अत्यधिक डर की स्थिति में इसका तेज स्राव होता है. डॉ विनय कहते हैं कि भूकंप से कंपन होता है और हमने ऐसी दुनिया बना रखी है कि उसमें और परेशान होते रहते हैं. जापान और यूरोप में लोगों ने प्रकृति के साथ समन्वय करके जीना एक आदत के तौर पर लिया है. लेकिन हमलोग बहुत पीछे हैं. हर तरफ कंक्रीट का जाल है और इससे दब जाने या गिरने और गंभीर रूप से चोट लगने की संभावना रहती है.