- भूकंप के झटकों ने डाला टूरिज्म इंडस्ट्री पर को संकट में

- लास्ट इयर के मुकाबले अप्रैल-मई में विदेशी सैलानियों की संख्या में भारी गिरावट

GORAKHPUR : नेपाल और उत्तर भारत के कई हिस्सों में लगातार आ रहे भूकंप के झटकों ने टूरिज्म इंडस्ट्री को खासा नुकसान पहुंचाया है. भूकंप ने नेपाल की टूरिज्म इंडस्ट्री को पूरी तरह तबाह कर दिया है तो झटकों के खौफ ने कुशीनगर, श्रावस्ती और गोरखपुर के टूरिज्म को काफी प्रभावित किया है. आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल के मुकाबले इस साल अप्रैल-मई में विदेशी सैलानियों की संख्या घट कर आधी रह गई है. विदेशी सैलानियों के न आने से जहां गर्मियों में गुलजार रहने वाले टूरिस्ट स्पॉट्स सूने पड़े हैं, वहीं पर्यटन से रोजी-रोटी चलाने वालों पर भी संकट मंडरा रहा है.

अचानक घटी विदेशी सैलानियों की संख्या

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भूकंप ने किया झांकी का रंग फीका

टूरिज्म डिपार्टमेंट के अफसर भी स्वीकार कर हैं कि हालात बहुत नाजुक हैं. ख्भ् अप्रैल को नेपाल में आए भूकंप और उसके बाद लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के चलते फॉरेनर टूरिस्ट्स की संख्या अचानक घटी है. इससे बिजनेस प्रभावित होना शुरू हो चुका है. कुशीनगर, श्रावस्ती और लुंबिनी, सभी टूरिज्म पर निर्भर हैं. ब् मई को बुद्घ पूर्णिमा थी, जो बौद्घ धर्म का सबसे बड़ा पर्व है. हर साल इस पर्व पर मनोरम झांकी निकाली जाती है जिसमें बड़ी संख्या में विदेशी सैलानी हिस्सा लेते हैं, लेकिन भूकंप के बाद झांकी में बहुत कम गैदरिंग हुई. जो विदेशी पर्यटक झांकी के लिए कुशीनगर में डेरा डाले थे, वे भी भूकंप के डर से पहले ही निकल गए.

बुद्घिस्ट प्लेसेज पर होती थी जबरदस्त भीड़

गोरखपुर में टूरिस्ट्स का पीक सीजन अक्टूबर-मार्च के बीच माना जाता है. चूंकि गोरखपुर बौद्घ धर्म के पवित्र स्थलों जैसे कुशीनगर, श्रावस्ती और लुंबिनी के काफी नजदीक है, इसलिए अप्रैल से जून के बीच इन जगहों पर जाने वाले टूरिस्ट्स की संख्या सबसे ज्यादा होती थी.

इन देशों के टूरिस्ट्स बढ़ाते थे शान

श्रीलंका, इंडोनेशिया, सिंगापुर, बैंकॉक, जापान, नेपाल, फ्रांस, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया आदि.

देसी टूरिस्ट्स ने भी किया किनारा

गर्मी की छुट्टियां होते ही लोग हिल स्टेशंस या ठंडे प्लेसेज की ओर रुख करते हैं. भूकंप ने इस ट्रेंड को बुरी तरह अफेक्ट किया है. अपना ट्रेवल प्लान कर चुके लोगों ने भूकंप से खौफजदा होकर पूरा टूर कैंसिल कर दिया है. राप्तीनगर एरिया के रहने वाले रवि नासिक में टीचर हैं. वे हर साल समर वेकेशंस में पूरी फैमिली के साथ गोरखपुर आते हैं. इस बार भी उन्होंने दो महीने पहले रिजर्वेशन कराया था, लेकिन भूकंप के बाद उन्होंने गोरखपुर आने का प्लान ड्रॉप कर दिया है. वहीं दिव्यनगर के रहने वाले सुदामा तिवारी अपने बेटे का इंतजार कर रहे हैं. उनका बेटा फणीश हैदराबाद में काम करता है. हर साल गर्मी की छुट्टियों में गांव आता था, लेकिन इस बार भूकंप के चलते उसने बना बनाया प्लान कैंसिल कर दिया. ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो भूकंप की दहशत में महीनों पहले कराए गए टूर प्लान को पोस्टपोन या कैंसिल कर रहे हैं.

भूकंप के झटके से टूरिज्म पर बुरा असर पड़ा है. टूरिस्ट्स की संख्या में गिरावट आई है. नेपाल की बुकिंग बिलकुल भी नहीं आ रही है.

अमित पोद्दार, टूर ऑपरेटर

भूकंप के चलते टूरिस्ट्स की संख्या में काफी कमी आई है. जब से भूकंप के झटके आए हैं, तब से बुकिंग पर काफी असर पड़ा है.

मुकेश, टूर ऑपरेटर

नेपाल व उत्तरी भारत में आ रहे भूकंप के झटकों का असर विदेशी सैलानियों की आमद पर पड़ा है. लास्ट इयर के मुकाबले विदेशी टूरिस्ट्स की संख्या में भारी गिरावट आई है.

पीके राय, टूरिस्ट ऑफिसर, रीजनल टूरिज्म डिपार्टमेंट