- कई मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनियां हो रही ऑपरेट

- कुछ कंपनियों को जल्द ही नोटिस देने जा रही ईडी

- जेकेवी का गोरखधंधा सामने आने पर अलर्ट हुई ईडी

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LUCKNOW : राजधानी से ऑपरेट हो रही कई मल्टी लेवल मार्केटिंग कंपनियां इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट के निशाने पर आ गयी हैं. खासतौर पर गोमतीनगर के विभूतिखंड स्थित साइबर हाइट्स टावर पर ईडी पैनी नजर रखे है क्योंकि यहां से कई कंपनियों के जरिए आम निवेशकों को लुभावनी स्कीम का झांसा देकर धोखा देने का सिलसिला जारी है. ईडी के सूत्रों की मानें तो जल्द ही इनमें से कई कंपनियों को नोटिस जारी कर उनके डायरेक्टर्स और निवेशकों की पूरी जानकारी तलब की जाएगी. दरअसल, आशंका जताई जा रही है कि पूर्व में धोखाधड़ी अंजाम देने वाली कई कंपनियों के डायरेक्टर और एजेंट अब नये नाम से कंपनियां खोलकर आम जनता को ठग रहे हैं.

राजेश सिंह के कारनामे आ रहे सामने

वहीं दूसरी ओर ईडी के शिकंजे में आए जेकेवी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर लिमिटेड के एमडी राजेश सिंह के कुछ और कारनामे भी सामने आने लगे हैं. सामने आया है कि राजेश सिंह को दो साल पहले लखनऊ पुलिस ने गाड़ी चोरी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा था. दरअसल राजेश सिंह चोरी हुई गाड़ी को चला रहा था. गाड़ी का इंश्योरेंस करने वाली कंपनी को जब राजधानी के एक सर्विस सेंटर के जरिए इसका पता लगा तो वह पुलिस के साथ राजेश सिंह के सहारा स्टेट स्थित आवास पर जा धमकी. वहां पर उसे चोरी हुई इंडिका कार खड़ी मिली जिसे राजेश सिंह ने दूसरे रंग से पेंट करा दिया था. इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया हालांकि उसे कुछ दिन के भीतर ही जमानत मिल गयी थी.

सरकारी संपत्ति बनेगी जेकेवी मिरेकल्स

वहीं ईडी के सूत्रों के मुताबिक राजेश सिंह ने टेढ़ी पुलिया स्थित जिस जेकेवी मिरेकल्स बिल्डिंग का निर्माण कर उसमें 70 फ्लैट बनाए थे, उन्हें जल्द ही अटैच कर सरकारी संपत्ति घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. साथ ही आयान बिल्डर के सारे बैंक खाते भी खंगाले जाएंगे. इससे यह भी साफ हो गया है कि जेकेवी मिरेकल्स में फ्लैट खरीदने वालों की रकम भी डूब सकती है. वहीं जेकेवी के निवेशकों का डूबा पैसा वापस दिलाने को ईडी राजेश सिंह और कंपनी के बाकी डायरेक्टर्स द्वारा खरीदी गयी बाकी संपत्तियों को भी अटैच करने की तैयारी में है. ध्यान रहे कि ईडी की छापेमारी के दौरान राजेश सिंह के आवास से दो दर्जन से ज्यादा संपत्तियों के दस्तावेज बरामद किए गये थे. ईडी बाकी डायरेक्टर्स के जरिए खरीदी गयी संपत्तियों का भी तेजी से पता लगा रही है.