-शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े की जांच कमेटी पर अभ्यर्थियों को नहीं भरोसा

-फर्जीवाड़े और गड़बडि़यों की जांच सीबीआई से कराने की उठी मांग

allahabad@inext.co.in

ALLAHABAD: सहायक अध्यापक पदों पर भर्ती में हुए फर्जीवाड़े और गड़बड़ी को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. जांच के लिए टीमें गठित कर दी गई है, लेकिन इन टीमों पर अभ्यर्थियों को भरोसा नहीं है. ऐसे में शुक्रवार को अभ्यर्थियों ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की. ताकि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके.

जिन पर आरोप, उन्हीं को क्यों सौंपी जांच

शिक्षक भर्ती की सीबीआई जांच की मांग को लेकर परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पहुंचे अभ्यर्थियों का कहना है कि जिन लोगों पर आरोप लग रहे हैं उन्हीं से अगर जांच करायी जाएगी तो दोषियों पर कार्रवाई कैसे होगी. ऐसे में पूरे फर्जीवाड़े की जांच के लिए सीबीआई ही ऐसी संस्था है जिससे निष्पक्ष जांच की उम्मीद की जा सकती है. अभ्यर्थियों का कहना है कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के अधिकारियों का कहना है कि अभ्यर्थियों को गलत अंक मिलने का कारण कोडिंग व्यवस्था है. इसी वजह से दूसरों के अंक अन्य किसी को मिल गए. ऐसे में अगर 122 अंक पाने वाले अभ्यर्थी को किसी और का 22 अंक मिल सकता है तो इस अभ्यर्थी का 122 अंक किसी दूसरे अभ्यर्थी को मिला होगा. उस अभ्यर्थी को नियुक्ति भी मिल जाएगी.

टीईटी 2011 जैसा न हो हाल

सूबे में परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापक पदों पर नियुक्ति के लिए सूबे में पहली बार टीईटी यानी टीचर्स एलिजबिलिटी टेस्ट का आयोजन हुआ था. टेस्ट कराने की जिम्मेदारी यूपी बोर्ड को मिली थी. इसमें भी एक के बाद एक लगातार फर्जीवाड़े और गड़बडि़यां सामने आयी थीं. फर्जीवाड़े में यूपी बोर्ड के तत्कालीन डायरेक्टर संजय मोहन को एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था. संजय मोहन पर टीईटी 2011 के दौरान फर्जीवाड़े से नम्बर बढ़ाने का आरोप लगा था. उसके बाद से टीईटी कराने की जिम्मेदारी परीक्षा नियामक को मिल गई थी.

वर्जन

फर्जीवाड़े के खेल में भले ही अधिकारी खुद का दामन साफ बताने में लगे है. लेकिन सीबीआई जांच होने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा.

अंकित वर्मा

- जिन पर आरोप लग रहा है, उन्हीं को जांच सौंपी गई है. ऐसे में जांच निष्पक्ष होना संभव नहीं है. इसलिए हम अभ्यर्थी सीबीआई जांच की मांग कर रहे है.

विशाल प्रताप

- अभ्यर्थियों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है. इस प्रकार का काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

मनोज कुमार

- परीक्षा नियामक प्राधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे है. जबकि जांच के लिए बनी टीम में उनको भी शामिल किया गया है. बिना सीबीआई जांच के वास्तविकता सामने नहीं आएगी.

अनूप सिंह