RANCHI: एक तरफ बिजली की बेरूखी ऊपर से डीजल की कीमतों में उछाल ने लोगों का मिजाज किरकिरा कर दिया है. आसमान से बरस रही आग से निजात पाने के लिए अपार्टमेंट सोसाइटी में रहने वाले लोगों का खर्चा बढ़ गया है. सिटी में इन दिनों गर्मी का कहर है और एक मिनट का पावर कट भी उनको परेशान कर देता है. मजबूरी में जेनेरेटर के भरोसे सोसाइटी की लिफ्ट, एसी और पानी के लिए मोटर चलानी पड़ती है. लगातार बिजली की आंखमिचौली ने सोसाइटी में रहने वालों पर मेंटेनेंस का लोड बढ़ गया है.

40 परसेंट बढ़ा डीजल खर्च

राजधानी की सोसाइटी में रहने वालों को इन दिनों करीब 8 से 10 घंटे जेनरेटर चलाने पड़ रहे हैं. अमूमन जेनरेटर 5-6 घंटे चला करता था और हर दिन करीब 50 लीटर डीजल की खपत होती थी, लेकिन अब यही डीजल आठ से दस घंटे तक जेनरेटर चलाने के लिए 70 -80 लीटर डीजल खर्च करना पड़ रहा है. बड़ी सोसाइटी में 100 केवीए तक के जेनसेट लगे होते हैं, जिनपर एक घंटे में करीब 7-8 लीटर डीजल खर्च होता है.

ऐसे समझिए डीजल खर्च का गणित

पहले जहां डीजल की कीमत 66 रुपए प्रति लीटर के आसपास हुआ करती थी, लेकिन पिछले दो सप्ताह में डीजल के दाम 72 रुपए 58 पैसे हो गए हैं. पहले जहां 50 लीटर के लिए 3300 रुपए देने पड़ते थे वहीं अब 3629 रुपए देने पड़ रहे हैं. ऊपर से बिजली नियमित न रहने के कारण भी डीजल खर्च बढ़ा है, सो अलग.

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क्या कहते हैं सोसाइटी के लोग

एक तो बिजली ने गर्मी में परेशान कर रखा है, ऊपर से डीजल पेट्रोल की कीमतो में रोज हो रही वृद्धि ने भी परेशान कर दिया है. खर्च बढ़ गया है और हर दिन जेनरेटर पर डिपेंड रहना पड़ रहा है.

-विष्णु बुधिया, एग्जीक्यूटिव मेंबर, ब्लेयर अपार्टमेंट

डीजल की कीमतें रोज बढ़ रही हैं. ऊपर से बिजली की आंखमिचौली ने बजट का आकार बढ़ा दिया है. पहले जहां हर महीने डीजल पर दस हजार रुपए का खर्च आता था अब वह बढ़कर 12 हजार हो गया है.

-आशीष जैन,सेक्रेट्री, पितांबरा, रेसीडेंसी