बड़ा खुलासा: अतिक्रमण ही नहीं नियम भी तोड़े गए, न नापी की और ना दिया नोटिस

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PATNA : पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर नगर निगम और जिला प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा दी. जहां मन में आया

उजाड़कर चल दिए. नगर निगम की टीम ने लोगों की लाखों रुपए की संपत्ति को तहस नहस दिया. लेकिन खुद उन नियमों का पालन नहीं हुआ जो किसी भी अतिक्रमण को हटाने में नगर निगम और जिला प्रशासन को करना चाहिए.

दरअसल, अतिक्रमण को हटाने के लिए नगर निगम को म्यूनिसिपल एक्ट 2007 को फॉलो करना चाहिए था. लेकिन नगर निगम और प्रशासन ने तानाशाही तरीके से शहर भर में ढाई महीने तक अतिक्रमण अभियान चलाया. लोगों के घरों और दुकानों के अलावा बड़ी-बड़ी व्यावसायिक इमारतों को तोड़ दिया. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की टीम ने पूरे शहर में घूमकर अतिक्रमण हटाने की पड़ताल की तो चौंकाने वाला सच सामने आया. लोगों ने बताया कि अतिक्रमण हटाने में नगर निगम और प्रशासन ने म्यूनिसिपल एक्ट 2007 को नजरंदाज कर दिया.

विरोध किया तो फंसा दिया

अतिक्रमण अभियान में जिन मकान मालिक और दुकानदारों ने नियम-कानून की बात की. उनके ऊपर गाज गिरी. न सिर्फ उनका निर्माण मनमाने तरीके से तोड़ा गया बल्कि उनसे हजारों रुपए जुर्माना भी वसूल कर लिया गया. इनके ऊपर एफआईआर भी दर्ज की गई. लोगों का आरोप है कि निगम ने बिना नक्शा देखे और नापे ही अतिक्रमण को चिन्हित कर दिया गया. साथ ही अतिक्रमण तोड़ने से पहले नोटिस तक नहीं दिया गया. कुछ लोगों ने जब इसका हवाला दिया तो उनकी खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर दी गई.

क्या कहता है कानून

बिहार म्यूनिसिपल एक्ट 2007 की धारा 304 के तहत यह स्पष्ट उल्लेख है कि कोई भी ऐसी जमीन या सड़क जो नगर निगम क्षेत्र में आती हो और उसका मालिकाना हक नगर निगम के मौजूद है, उस पर पक्का मकान, सीढ़ी, बाउंड्री, घेरा, बरामदा, प्लेटफार्म या फिर कोई अन्य ढांचा बना लिया गया हो. नगर निगम सबसे पहले विभागीय इंजीनियर, जिला प्रशासन, पुलिस, विद्युत विभाग के साथ सर्वे करेगा. मौके पर कब्जे की जमीन को मापा जाएगा. इसके बाद उस स्थान पर लाल रंग का निशान लगाया जाएगा. साथ ही नगर निगम अतिक्रमणकारी को सात दिनों का समय देगा और इसके लिए बकायदे निगम से नोटिस भेजा जाएगा.