- हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ तक की कैबिनेट के आदेश भी दायरे में
- दिया बयान, जीओ के मुताबिक ही दिये जाते थे खनन पट्टे
- ईडी में जमा किए कई दस्तावेज, अपनी संपत्तियों की जानकारी
- 34 पट्टे आवंटित किए थे चंद्रकला ने डीएम रहने के दौरान
- 14 पट्टे नये जारी किए थे, 20 का किया था रिनीवल
- 08 घंटे तक ईडी के अफसरों ने की चंद्रकला से पूछताछ
- 100 से ज्यादा सवालों से जूझती रहीं आईएएस चंद्रकला
- 10 साल का आईपीआर भी ईडी में किया जमा
- 20 से ज्यादा शासनादेशों की प्रतियां भी साथ लेकर आईं थीं


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LUCKNOW: करीब आधा दर्जन अधिकारियों की टीम ने चंद्रकला से खनन घोटाले से जुड़े राज उगलवाने की कोशिश की तो वह बड़े अफसरों द्वारा जारी किए गये आदेशों का हवाला देते हुए खुद को बेगुनाह करार देती रहीं। चंद्रकला ने ईडी को इस बाबत तमाम शासनादेश की प्रतियां भी मुहैया कराई। साथ ही अपनी चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा भी दिया। ईडी ने उनके कार्यकाल में आवंटित किए गये 34 खनन पट्टों को लेकर सौ से ज्यादा सवाल किए। ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया है कि तत्कालीन कैबिनेट ने हाईकोर्ट के निर्देशों को दरकिनार कर खनन के पट्टे आवंटित करने के कई निर्णय लिए थे, जिसकी अब पड़ताल की जाएगी।

14 नये पट्ट किये थे आवंटित

चदरअसल हमीरपुर में डीएम रहने के दौरान चंद्रकला ने कुल 34 पट्टों का आवंटन किया था। इनमें से 14 नये पट्टे दिए गये थे जबकि 20 का रिनीवल किया गया था। ईडी ने इस मामले का केस दर्ज करने के बाद विगत 24 जनवरी को चंद्रकला को तलब किया था। चंद्रकला ने अपने वकील के जरिए ईडी द्वारा मांगे गये दस्तावेज भेजे थे और खुद आने के लिए थोड़ा वक्त मांगा था। बुधवार को अचानक चंद्रकला अपने वकीलों के साथ सुबह आठ बजे ईडी दफ्तर आईं जिसके बाद उनसे पूछताछ का सिलसिला शुरू कर दिया गया। इस दौरान ईडी के ज्वाइंट डायरेक्टर राजेश्वर सिंह कार्यालय में मौजूद थे। ईडी के अफसरों ने चंद्रकला के सामने सभी लीज के दस्तावेज रखकर पूछताछ शुरू की तो वह खुद को बेकसूर बताने लगीं। उन्होंने कहा कि खनन के पट्टे देने का आदेश राज्य सरकार की ओर से आता था। उनको हाईकोर्ट द्वारा खनन के पट्टे आवंटित करने की ई-टेंडर प्रक्रिया को अपनाने का कोई आदेश भी नहीं मिला था। पट्टों को आवंटित करने की प्रक्रिया कैबिनेट निर्धारित करती थी। हालांकि जब उनसे बाकी पट्टों के रिनीवल और अवैध खनन की रोकथाम को लेकर सवाल किए गये तो उन्होंने चुप्पी साध ली। करीब आठ घंटे तक चली पूछताछ के बाद शाम छह बजे उनको जाने दिया गया। ईडी के सूत्रों की मानें तो चंद्रकला घोटाले के असली गुनहगारों को बचाने का प्रयास कर रही हैं जिसकी वजह से उनको जल्द दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

एमएलसी रमेश मिश्रा के बाद अचानक आईं चंद्रकला
इसे ईडी के अफसरों की सख्ती का नतीजा ही माना जाएगा कि जो आरोपी जांच एजेंसी के सवालों का जवाब देने से बच रहे थे वे बीते 24 घंटों के दौरान अचानक हाजिर होने लगे। दरअसल उनके खुद आने के बजाय अपने वकीलों के जरिए जवाब भेजने की रणनीति काम नहीं आई और आखिरकार उनको जांच एजेंसी के सवालों का सामना करना पड़ गया। मंगलवार देर शाम सपा एमएलसी रमेश मिश्रा ने ईडी के दफ्तर में अचानक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई जिसके बाद उनसे तीन घंटे तक गहन पूछताछ की गयी। इस दौरान रमेश मिश्रा भी खुद को बेकसूर बताते रहे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्धारित प्रक्रिया के मुताबिक ही उनको खनन के पट्टे आवंटित किए गये हालांकि जब उनसे तत्कालीन खनन मंत्रियों से रिश्तों और अवैध खनन के बारे में सवाल पूछने शुरू किए गये तो वह गोलमोल जवाब देने लगे।

आईएएस बी चंद्रकला ने अपनी सारी संपत्तियों की जानकारी मुहैया करा दी है। उनके दस साल के आईपीआर (चल-अचल संपत्तियों का विवरण) के साथ उनकी सारी संपत्तियों की भी गहन पड़ताल की जाएगी जिसके बाद उनको दोबारा पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा। तत्कालीन कैबिनेट द्वारा पट्टों के आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित करने के फैसलों की जांच भी की जाएगी। अवैध खनन से होने वाली कमाई को कहां निवेश किया गया है, इसकी गहराई से जांच की जाएगी।
राजेश्वर सिंह, ज्वाइंट डायरेक्टर, ईडी लखनऊ

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