कानपुर। भारत बनाम इंग्लैंड के बीच एजबेस्टन में खेला गया पहला टेस्ट बेहद रोमांचक रहा। भारत यह मैच मामूली अंतर से हार गया। इंग्लैंड द्वारा मिले 194 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम दूसरी पारी में 162 रन पर ढेर हो गई। कप्तान विराट कोहली को छोड़ कोई भी भारतीय बल्लेबाज पिच पर ज्यादा देर नहीं टिक सका। तो आइए जानें पहले टेस्ट में भारत की हार के 5 कारण कौन से हैं....

1. फेल हो गए ओपनर्स
एजबेस्टन टेस्ट में भारतीय ओपनर बल्लेबाज पूरी तरह से फ्लॉप रहे। मुरली विजय ने जहां दोनों पारियों में 26 रन बनाए तो वहीं शिखर धवन के बल्ले से सिर्फ 39 रन निकले। धवन से टीम इंडिया को काफी उम्मीद थी। पिछले कुछ समय से टीम इंडिया के गब्बर शानदार फॉर्म में थे। हालांकि इंग्लैंड आते ही उनके प्रदर्शन में काफी गिरावट हुई। अभ्यास मैच में भी शिखर दोनों पारियों में बिना खाता खोले पवेलियन लौट गए थे। ऐसे में जब एजबेस्टन में टीम को एक अच्छी शुरुआत की जरूरत थी तो दोनों भारतीय ओपनर बल्लेबाज फ्लॉप रहे।
एजबेस्टन टेस्ट में भारत की हार के ये हैं 5 कारण,अंग्रेजों को भी ये बात थी पता
2. केएल राहुल पर कर गए ज्यादा भरोसा
टीम इंडिया के उभरते स्टार बल्लेबाज केएल राहुल सीमित ओवरों के लिए बिल्कुल फिट हैं मगर टेस्ट में उन्हें खिलाने से पहले शायद विराट को दोबारा सोचना होगा। खासतौर से इंग्लैंड जैसी पिचों पर खेलने का उनके पास अनुभव कम है। इसी का फायदा इंग्लिश गेंदबाजों ने उठाया। क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक, टेस्ट करियर में 40 से ज्यादा की औसत से रन बनाने वाले राहुल एजबेस्टन टेस्ट में दोनों पारियों में मात्र 17 रन ही जोड़ पाए। टेस्ट क्रिकेट में मध्यक्रम बल्लेबाज की काफी अहमियत होती है। जब भारतीय ओपनर्स फ्लॉप साबित हो रहे थे तब राहुल का पिच पर टिक न पाना भारत को हार की तरफ ले गया।
एजबेस्टन टेस्ट में भारत की हार के ये हैं 5 कारण,अंग्रेजों को भी ये बात थी पता
3. पुजारा को न खिलाना
टेस्ट क्रिकेट में 50 से ज्यादा की औसत से रन बनाने वाले चेतेश्वर पुजारा को प्लेइंग इलेवन में न खिलाना सबसे बड़ी गलती थी। खासतौर से तब, जब पुजारा काफी समय से इंग्लैंड में काउंटी क्रिकेट खेल रहे हैं और उन्हें वहां की कंडीशन अच्छे से पता हैं। क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक, पुजारा के नाम 58 टेस्ट मैचों में 4531 रन दर्ज हैं जिसमें 14 शतक और 17 अर्धशतक शामिल हैं। यह रिकॉर्ड देखकर भी पुजारा को बाहर बिठाना शायद भारतीय टीम मैनेजमेंट की सबसे बड़ी भूल साबित हुआ।
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4. विराट नहीं लगा पाए नैय्या पार
बतौर कप्तान किसी भी खिलाड़ी की जिम्मेदारी होती है वह अपनी टीम को जीत की दहलीज पर ले जाए। विराट कोहली ने पहली इनिंग्स में 149 रन की पारी खेलकर भारत को मैच जिताने की पूरी कोशिश की मगर सेकेंड इनिंग्स में जब लक्ष्य हासिल करना था तो ये चेज मास्टर भी पीछे रह गया। दूसरी पारी में कोहली 51 रन बनाकर आउट हो गए और इंग्लिश गेंदबाज अच्छे से जानते थे कि विराट का विकेट ले लिया तो मैच उनकी मुठ्ठी में होगा क्योंकि एजबेस्टन टेस्ट में कोहली के अलावा किसी भी भारतीय बल्लेबाज का बल्ला नहीं चला।
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5. तेज उछाल वाली पिचों पर भारतीय बल्लेबाजों की कमजोरी
एजबेस्टन टेस्ट में भारत की हार के सिर्फ और सिर्फ बल्लेाज जिम्मेदार हैं। भारतीय गेंदबाजों ने तो अंग्रेजों को सस्ते में समेटकर मैच में बने रहने की पूरी कोशिश की। मगर भारतीय बल्लेबाजों की तेज उछाली वाली पिचों पर बल्लेबाजी न कर पाने की कमजोरी फिर जगजाहिर हो गई। दूसरी पारी में आदिल रशिद के एक विकेट को छोड़ दिया जाए तो भारत के 9 बल्लेबाजों का शिकार इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों ने किया। खासतौर से बेन स्टोक्स ने कोहली का विकेट लेकर मैच पूरी तरह से बदल दिया।
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