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PATNA : वायरल फीवर समझकर बच्चों को बुखार में खुद से कोई दवाई नहीं दें यह घातक साबित हो सकता है और इससे हालत बिगड़ सकती है. पटना में डेंगू के बढ़ते दायरे को लेकर डॉक्टरों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. बाल रोग विशेषज्ञों के पास पहुंच हर बुखार से पीडि़त मासूमों में हर चौथे बच्चें में डेंगू के लक्षण मिल रहे हैं. हालांकि कम बच्चों में डेंगू घातक स्टेज में होता है लेकिन इसमें समय से उपचार नहीं होने से हालत नाजुक हो सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को तेज बुखार में कोई हाईपावर की दवा बिना जांच के नहीं देना है.

वायरल बुखार को न लें हल्के में

डॉक्टरों का कहना है कि वायरल बुखार को हल्के में नहीं लेना है, क्योंकि इसके व डेंगू के लक्षण में बहुत अधिक फर्क नहीं होता है. यह जांच के बाद ही क्लीयर हो पाता है कि पेशेंट को डेंगू है या फिर वायरल फीवर. डॉक्टरों का कहना है कि वायरल में भी शरीर पर दाना के साथ हाई फीवर होता है. बदन में दर्द और बच्चों का सुस्त पड़ जाना दोनों अटैक में होता है. ऐसे में अधिकतर पैरेंट्स ऐसे हैं जो या तो खुद से कोई दवा देने लगते हैं या फिर मेडिकल स्टोर वालों से सलाह लेकर दवा खिला देते हैं. वायरल फीवर हुआ तब तो गनीमत है लेकिन अगर बच्चे को डेंगू है तो ऐसी दवाएं हालत बना सकती हैं. ऐसे में डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों के बुखार को लेकर डेंगू वाले सीजन में पूरी तरह से अलर्ट रहें और बिना चिकित्सकीय परामर्श के कोई दवा नहीं दें.

निगम की मनमानी भारी

निगम की मनमानी मासूमों पर भारी पड़ रही है. साफ सफाई के साथ दवाओं के छिड़काव में भी काफी मनमानी की जा रही है. कंकड़बाग एरिया में डेंगू का अटैक होने के पीछे निगम की बड़ी मनमानी सामने आई है. दवाओं के छिड़काव को लेकर यदि जिम्मेदार गंभीर होते तो कंकड़बाग में ऐसे अटैक नहीं होते. पटना में एक दो नहीं 100 से अधिक मोहल्ले हैं जहां सफाई के साथ दवाओं के छिड़काव नहीं हो रहा है. राजीवनगर, केसरीनगर, पटेलनगर, बाबा चौक, रामनगरी, दलदली, अभियंता नगर के साथ कई मोहल्ले इसमें शामिल हैं.