1- हिन्‍दू मेरिज एक्‍ट 1955 के सेक्‍शन 14 के तहत एक शादीशुदा जोड़ा अपनी शादी के एक साल पूरा होने तक तलाक के लिए अर्जी नही दे सकता है। फिर चाहे वो पुरुष हो या महिला। यदि सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि अर्जी देने वाला अनेको समस्‍याओं से घिरा है तो वह तलाक फाइल कर सकता है।
महिलाओं के ये दस अधिकार जान लेंगी तो कोई कुछ नही बिगाड़ पाएगा आपका!

2- इंडियन सराइस एक्‍ट 1867 के तहत भारत का कोई भी नागरिक किसी भी समय किसी भी होटल में अपने या अपने पालूत जानवर के लिए पानी का प्रयोग कर सकता है। कोई भी महिला या पुरुष होटल का वॉशरूम भी प्रयोग कर सकता है। इसके लिए उसे कोई चार्ज नही देना होगा।
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3- सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि किसी भी महिला को सूर्योदय से पहले या सूर्यास्‍त के बाद हिरासत में नही लिया जा सकता है। यदि पुलिस को कोई सबूत के तौर पर कोई लिखित दस्‍तावेज मिलता है जिसमें कारण पूछा जाए कि आप इस महिला को क्‍यों हिरासत में लेना चाहते हैं तो यह फैसला बदल सकता है।
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4- 2013 में दिल्‍ली पुलिस ने यह घोषणा की थी कि कोई भी महिला किसी भी पुलिस स्‍टेशन में अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना किसी भी समय एफआईआर दर्ज करा सकती है। पुलिस को उसकी रिपोर्ट ठीक उसी तरह दर्ज करनी होगी जैसी महिला चाहती है। यह भी कहा गया है कि जांच महिला द्वारा दिए गये बयान के अनुसार की जाएगी।
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5- दंड प्रक्रिया संहिता के सेक्‍शन 51 कें तहत एक महिला को सिर्फ एक महिला ऑफीसर ही हिरासत में ले सकती है। महिला ऑफीसर को ही आरोपी महिला की तलाशी लेने और उसकी जांच करने का अधिकार है।
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6- दिल्‍ली पुलिस की घोषणा के अनुसार यदि कोई महिला पुलिस स्‍टेशन जाने में सक्षम नही है तो वो अपनी शिकायत ईमेल या पोस्‍ट के जरिए भी कर सकती है। महिला द्वारा भेजी गई शिकायत को ही एफआईआर में दर्ज किया जाएगा।
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7- होटल एसोशिएशन ऑफ इंडिया जो पूरे भारत में 280 से अधिक होटल संचालित करती है ने घोषणा की है कि भारतीय कानून में ऐसा कोई भी नियम नही हैं जिसमें किसी अविवाहित जोड़ों को होटल में प्रवेश करने से रोका जाए।
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8- हिन्‍दू एडाप्‍टेशन एंड मेंटीनेन्‍स एक्‍ट 1956 के तहत कोई भी विवाहित जोड़ा एक साथ एक ही लिंग के दो बच्चों को गोद नही ले सकता है।
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9- महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 2011 में घोषणा की थी कि कोई भी पुरुष जो अकेला रहता है किसी लड़की या बच्‍ची को गोद नही ले सकता है।
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10- मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के तहत किसी भी महिला को गर्भवती होने के दौरान या गर्भवती होने के कारण नौकरी से नही निकाला जा सकता है।
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