- तापमान बढ़ने के साथ बढ़े एसी के यूज ने बढ़ाए अस्थमा, एलर्जी और निमोनिया के केस

- एसी का पानी एक जगह जमा होने से ग्रोथ करता है निज्योनेला बैक्टिरिया, हवा के रास्ते फेफड़े तक पहुंच बना रहा बीमार

GORAKHPUR: भीषण गर्मी के बीच बढ़ा एयरकंडीशन का यूज तपिश से तो सुकून दिला दे रहा लेकिन इसने मौसमी बीमारियां बांटनी भी शुरू कर दी हैं। ज्यादातर एसी में रहने वाले यंगस्टर्स, सिनियर सिटीजंस और महिलाएं एसी में पनपने वाले निज्योनेला बैक्टिरिया के चलते अस्थमा, एलर्जी और निमोनिया तक की जद में आ जा रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक एसी के अंदर एसी का पानी एकत्र होने से निज्योनेला बैक्टिरिया ग्रोथ होता है जो हवा के रास्ते फेफड़े तक पहुंच इन बीमारियों की वजह बन रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग में डेली सांस संबंधी बीमारियों के शिकार 15-20 मरीज पहुंच रहे हैं।

सुकून की तलाश में मोल न लें बीमारी

गर्मियों के दिनों में लोग घर, ऑफिस और कार हर जगह एसी में रहना पंसद करते हैं। एसी से बाहर निकलने में उन्हें मुश्किल होती है। तापमान करीब 45 डिग्री तक पहुंच चुका है, ऐसे में शहर में एसी की डिमांड भी अधिक बढ़ गई है। एसी बचने वाले शॉप ओनर्स के मुताबिक अभी तक दस हजार एसी की बिक्री हो चुकी है। लेकिन एसी में रहने की आदत लोगों की सेहत पर नकारात्मक असर डाल रही है। एसी में पनपने वाले निज्योनेला बैक्टिरिया के चलते लोगों को सांस से जुड़ी परेशानियां घेर रही हैं। वहीं, जिन यंगस्टर्स, सीनियर सिटीजन व महिलाओं को दिनभर एसी में बैठने की आदत नहीं है, उन्हें सर्दी, जुखाम, खांसी, बुखार अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। तापमान में उतार चढ़ाव ने अस्थमा पेशेंट्स के लिए भी परेशानी खड़ी कर दी है।

विशेषज्ञों की मानें तो मॉल, होटल, सिनेमा घरों में लगे सेंट्रल एसी भी लोगों की हेल्थ पर बुरा असर डाल रहे हैं। जानकारों के मुताबिक एसी हमारे आसपास एक आर्टिफिश्यल टेंप्रेचर बनाता है जो इम्यून सिस्टम के लिए खतरनाक है। यदि आप बार-बार बीमार पड़ते हैं तो उसकी मेन वजह एसी में अधिक देर तक बैठना भी हो सकता है। इससे अस्थमा, एलर्जी होने का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही एयरकंडीशन में यदि पानी एकत्र हो जाए तो उसमें पनपने वाला निज्योनेला बैक्टिरिया हवा के रास्ते फेफड़े तक पहुंच जाता है जिससे निमोनिया होने का भी खतरा होता है। ऐसे केस सरकारी व निजी हॉस्पिटल में एक हफ्ते में 15 से 20 आ रहे हैं।

एसी में ज्यादा रहने से होने वाले नुकसान - बुखार, थकान महसूस होना

- सांस फूलना

- खांसी आना

- निमोनिया

- ताजी हवा का अभाव

- हड्डियों की समस्या

- मोटापा बढ़ना

- मांसपेशियों में खिंचाव

- एसी के फिल्टर गंदे होने के चलते सांस की भी परेशानी हो सकती है

- निमोनिया का खतरा

- एसी से निकलने वाली हवा कई बार शरीर के जोड़ों में दर्द पहुंचाती है

- त्वचा पर झुर्रियां पड़ जाना

- गर्मी के प्रति सहनशीलता कम होना

- ड्राई आई की शिकायत

बचाव

- एसी को अच्छे तरीके से साफ करें

- मैकेनिक को बुलाकर फिल्टर की ठीक तरीके से सफाई कराएं

- एसी में ठहरे हुए पानी का एक हफ्ते में साफ करें

- फिल्टर की हर रोज सफाई करें जिससे संक्रमण का खतरा न हो

- बीमार पड़ने पर एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन करें

- ज्यादा परेशानी होने पर तत्काल डॉक्टर्स से संपर्क करें

वर्जन

निज्योनेला बैक्टिरिया से निमोनिया का खतरा रहता है। यह यंगस्टर्स से लेकर सिनियर सिटीजंस तक को अपनी चपेट में ले लेता है। ओपीडी में ऐसे केस आ रहे हैं। यह सबसे ज्यादा गर्मी के दिनों में होता है। जिनकी बॉडी में इम्यून सिस्टम कमजोर होता है वे बीमारी की चपेट में जल्दी आते हैं। ज्यादा दिक्कत होने पर तत्काल डॉक्टर्स से संपर्क करना चाहिए।

- डॉ। बीएन अग्रवाल, चेस्ट रोग विशेषज्ञ

एयरकंडीशन में ज्यादा रहने वाले लोगों को संक्रमण का खतरा रहता है। 10 से 15 केस सामने आ रहे हैं। ज्यादातर अस्थमा, एलर्जी के अलावा सिनियर सिटीजन में निमोनिया से ग्रसित मरीज आ रहे हैं।

- डॉ। अश्विनी मिश्रा, एचओडी चेस्ट व टीबी विभाग बीआरडी