क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : शहर में शराब के 'शौकीनों' की तादाद किस कदर बढ़ रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले 11 माह में 2,10,20,29,463 रुपए की शराब वे गटक गए. ये आंकड़ा इस साल जनवरी से लेकर नवंबर तक का है. खास बात है कि सरकार द्वारा शराब की बिक्री अपने हाथों में लेने के बाद वाइन शॉप की संख्या तो कम हुई, लेकिन शराब की खपत और शौकीनों की संख्या में कमी नहीं आई है. हालांकि, 2016 की तुलना में शराब खपत का आंकड़ा कम है. पिछले साल 'शौकीनों' ने करीब 334 करोड़ रुपए के शराब पीए थे.

दिसंबर में ज्यादा खपत!

एक्साइज डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक, इस साल जनवरी से लेकर नवंबर तक विभाग को शराब से 2.10 करोड़ से ज्यादा का राजस्व मिल चुका है. दिसंबर माह में शराब से मिले राजस्व का आंकड़ा जारी होना बाकी है. ठंड और नए साल को लेकर इस माह आम दिनों की तुलना में ज्यादा शराब की बिक्री होती है. ऐसे में राजस्व में और बढ़ोतरी होने की संभावना है.

पिछले साल से कम खपत

एक्सराइज डिपार्टमेंट को 2016 की तुलना में इस साल अबतक शराब से करीब 124 करोड़ रुपए कम राजस्व मिला है. पिछले साल जहां 324 करोड़ रुपए राजस्व मिले थे, वहीं इस साल नवंबर तक 210 करोड़ की ही शराब की बिक्री हुई है. हालांकि, दिसंबर में शराब से मिले राजस्व का आंकड़ा मिलना बाकी है.

रांची में हैं शराब की 72 दुकानें

रांची शहर में फिलहाल 52 शराब की दूकाने हैं. अगस्त महीने के पहले तक शहर में 172 शराब की दूकाने हुआ करती थी, लेकिन एक अगस्त से सरकार ने खुद से शराब बेचने की शुरूआत की, उसके बाद दुकानों की संख्या घट गई.

सरकार संचालित कर रही शराब दुकानें

इस साल एक अगस्त से राज्य सरकार ने शराब की दुकानों के संचालन का जिम्मा अपनी हाथों में ले लिया है. पूरे राज्य में बिवरेज कॉरपोरेशन के माध्यम से शराब दुकानों का संचालन किया जा रहा है. ऐसे में न सिर्फ शराब की दुकानों की संख्या में कमी आई है, बल्कि इससे मिलने वाले राजस्व में भी नुकसान हो रहा है.