- 302 किमी लंबा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे

- 13,200 करोड़ की लागत से बना

- 22 माह में पूरा हुआ निर्माण

- यूपीडा ने एजेंसी को काम सौंपने का किया फैसला, जारी की बिड

- जहां भी क्षतिग्रस्त होगा क्रैश बैरियर और फेंसिंग, करेगी दुरुस्त

ashok.mishra@inext.co.in

LUCKNOW : आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे पर यात्रियों को आवारा जानवरों के कहर से बचाने को यूपीडा ने निजी एजेंसी को काम देने का फैसला लिया है. इसके तहत एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के लिए बिड भी जारी कर दी गयी है, जिस एजेंसी को यह काम सौंपा जाएगा उसे पूरे एक्सप्रेस वे पर जगह-जगह क्षतिग्रस्त हुए क्रैश बैरियर और फेंसिंग को चिन्हित कर यूपीडा को रिपोर्ट करनी होगी. साथ ही इसे दुरुस्त करना होगा ताकि आवारा जानवर एक्सप्रेस वे के भीतर न आ सकें. ध्यान रहे कि बीते डेढ़ साल में एक्सप्रेस वे पर आवारा जानवरों की वजह से तमाम गाडि़यां दुर्घटनाग्रस्त हो चुकी हैं,जिनमें कई लोगों की जान भी जा चुकी है.

पूरे एक्सप्रेस वे पर रखनी होगी नजर

यूपीडा द्वारा चयनित एजेंसी को 302 किमी लंबे एक्सप्रेस वे पर पैनी नजर रखनी होगी ताकि स्थानीय लोगों द्वारा रास्ता बनाने के लिए फेंसिंग को क्षतिग्रस्त न किया जा सके. इसके लिए उसे मैनपॉवर का इंतजाम करना होगा जो चौबीस घंटे इस पर नजर रखेंगे. साथ ही कुछ टीमें भी बनानी होंगी जो एक्सप्रेस वे पर आने वाले जानवरों को पकड़ कर उन्हें कांजी हाउस इत्यादि भेज सके. हालांकि इस दौरान उसे यह भी ध्यान रखना होगा कि इससे एक्सप्रेस वे का ट्रैफिक बाधित न हो. साथ ही जिन स्थानों पर शरारतपूर्ण तरीके से क्रैश बैरियर, फेंसिंग इत्यादि को क्षतिग्रस्त किया गया है, उसके बारे में मेंटेनेंस ऑफिस में तत्काल सूचना देनी होगी. साथ ही इसके बारे में स्थानीय पुलिस को भी सूचित करना होगा. इसके लिए कम से कम पांच टीमें बनानी होंगी, प्रत्येक टीम में छह सदस्य तैनात करने होंगे. इसके अलावा पांच गाडि़यों का भी इंतजाम करना होगा जो एक्सप्रेस वे पर लगातार मॉनिटरिंग करेंगी. फिलहाल यूपीडा ने बड़े जानवरों के लिए दो हजार रुपये तथा छोटे जानवरों के लिए पांच सौ रुपये का भुगतान करने का निर्णय लिया है. साथ ही यह काम करने की इच्छुक कंपनियों से यह भी बताने को कहा गया है कि वे किस तरह इसे अमल में लाएंगे.

हादसों का एक्सप्रेस-वे

- 15 माह में हुए 937 हादसे

- 116 लोगों की मौत हो चुकी है हादसों में

- 23 दिसंबर 2016 को हुआ था एक्सप्रेस वे का शुभारंभ

- 30 जून 2018 तक हुए 937 सड़क हादसे

सर्वाधिक दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र

काकोरी, लखनऊ

औरास, उन्नाव

बांगरमऊ, उन्नाव

तिर्वा, कन्नौज

तालग्राम, कन्नौज

सौरिख, कन्नौज

करहल, मैनपुरी