लॉस एंजिल्स (पीटीआई) ए‍क इंटरनेशनल रिसर्च के मुताबिक दुनिया भर में युवाओं में नशे की लत छुड़वाने के लिए चलाई जाने वाली सोशल कैंपेन लोगों पर जितना असर डालतीं हैं, उसी उद्देश्‍य के साथ फेसबुक पर चलाया एंटी स्‍मोकिंग कैंपेन युवाओं पर उससे कहीं ज्‍यादा असर डालता है। journal Addiction में छपी यह ताजा स्‍टडी अपने आप में पहली है, जो युवाओं को प्रभावित करने के मामले में फेसबुक का प्रभाव दर्शाती है।

युवाओं को स्‍मोकिंग से दूर करने में फेसबुक का असर है ज्‍यादा तेज

कैलीफोर्निया यूनीवर्सिटी में इस रिसर्च से जुड़े एक्‍सपर्ट्स का मानना है कि स्‍मोकिंग छोड़ने में युवाओं का व्‍यवहार बदलने की जरूरत होती है और फेसबुक पर चलाए जाने वाले एंटी स्‍माकिंग कैंपेन तेजी से असर डालते हैं। कहने का मतलब यह है कि युवाओं के व्‍यवहार में साकात्‍मक बदलाव लाने में फेसबुक प्‍लेटफॉर्म कम समय में ही ज्‍यादा असर डालता है। इस तरह से फेसबुक उन लोगों को चुनौती दे रहा है, जो नशे के लती लोगों को खोजकर उन्‍हें ठीक करने में बहुत वक्‍त ले रहे हैं। इसी रिसर्च से जुडे एक्‍सपर्ट Danielle Ramo बताते हैं कि एक तरफ पुराने तरीकों से स्‍मोकिंग के लती लोगों को ठीक करने और इससे दूर करने में बहुत वक्‍त लग जाता है और कभी कभी तो एंटी स्‍मोकिंग कैंपेन जरूरतमंद लोगों तक टाइम पर पहुंच भी नहीं पाते। ऐसे में रिसर्च बताती है कि फेसबुक पर चलाए जाने वाले एंटी स्‍मोकिंग कैंपेन और प्रयास लोगों तक जल्‍दी पहुंच कर तेज असर दिखा रहे हैं।

तो अब फेसबुक छुड़ाएगा युवाओं में स्‍मोकिंग की लत! रिसर्च तो यही कह रही है

फेसबुक पर ऐसे चलती है एंटी स्‍मोकिंग कैंपेन

रिसर्च टीम के मुताबिक लोगों को स्‍मोकिंग से दूर रहने के लिए फेसबुक पर जो प्रयास किए जाते हैं, उनमें डेली सोशल पोस्‍ट के अलावा हर हफ्ते लाइव सवाल जवाब सेशन आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा बिहेवियरल काउंसलिंग सेशन के साथ साथ समय समय पर डॉक्‍टर्स के साथ ऑनलाइन सेशन कराए जाते हैं। इनमें पार्टीसिपेट करके स्‍मोकिंग के प्रति युवाओं में पॉजिटिव बदलाव देखे जा रहे हैं।

500 लोगों पर किया गया शोध, खुद में तेज सुधार करने वालों को मिला बोनस

कैलीफोर्निया यूनीवर्सिटी के एक रिसर्च ग्रुप द्वारा कराए गए इस शोध में अमरीका के नेशनल कैंसर इंस्‍टीट्यूट को भी शामिल किया गया था। इंस्‍टीट्यूट की वेबसाइट ने ट्रायल के दौरान लगतार फेसबुक का इस्‍तेमाल करके मरीजों को टारगेट किया, जिसका जबरदस्‍त प्रभाव देखने को मिला। इस शोध में 500 मरीजों को शामिल किया गया, जिनमें 45 परसेंट पुरुष थे। उन सबकी उम्र 21 साल के आसपास थी और उनमें से 87 परसेंट लोग चेन स्‍मोकर थे। इन सभी के व्‍यवहार की अलग अलग स्‍लॉट में 3 महीने से लेकर 12 महीनों तक जांच की गई। हर सेशन के दौरान जिन मरीजो में पॉजिटिव बदलाव दिखता था, उन्हे गिफ्ट के रूप में बोनस मिलता था।

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