- पहले जीवित प्रमाण पत्र लेकर जाना पड़ता था ट्रेजरी, तब रिलीज होती थी पेंशन

- अब ट्रेजरी जाने की जरूरत नहीं, ऑनलाइन होगी प्रक्रिया

DEHRADUN: पेंशनर्स को अब हर वर्ष जीवित प्रमाण पत्र के लिए सरकारी विभागों की भागदौड़ नहीं करनी पडेगी। वे घर बैठे मोबाइल एप के जरिए ट्रेजरी को अपने जीवित होने का प्रमाण दे सकेंगे। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की इस प्रॉसेस पर इनीशियली वर्कआउट शुरू कर दिया गया है। करंट फाइनेंशियल ईयर से ही ये नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।

मैनुअल थी पहले प्रक्रिया
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित ट्रेजरी से रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन रिलीज होती है। जो कर्मचारी जिस महीने सरकारी महकमे से रिटायर हुआ है, उसको हर वर्ष उसी माह ट्रेजरी जाकर अपने जिंदा होने का प्रमाण पत्र देना होता है। ये मैनुअल प्रॉसेस करने के बाद ही अब तक पेंशनर्स की पेंशन ट्रेजरी द्वारा रिलीज की जाती थी।

ट्रेजरी पहुंचने में होती थी दिक्कत
विभागों की दौड़भाग करने में कई बुजुर्ग पेंशनर्स को दिक्कत होती थी। उम्र के चौथे पड़ाव में ये दिक्कत और ज्यादा बढ़ जाती है। बीमारी की सूरत में परिवार वाले किसी तरह गाड़ी या एंबुलेंस बुक कर उन्हें ट्रेजरी ले जाते थे और जीवित प्रमाण पत्र सबमिट कराते थे।

अब घर बैठे दे सकते हैं प्रमाण
बुजुर्गो की दिक्कत को देखते हुए ट्रेजरी में जल्द ही पुरानी व्यवस्था खत्म कर ऑनलाइन सत्यापन व्यवस्था शुरू की जा रही है। नई व्यवस्था में रिटायर्ड कर्मचारी घर बैठे बॉयोमेट्रिक प्रॉसेस के जरिए अपने जिंदा होने का प्रमाण दे सकेंगे। इंटीग्रेटेड फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (आईएफएमएस) के जरिये ये प्रॉसेस होगी। जल्द ही ट्रेजरी का सिस्टम अपडेट किया जाएगा और इसका लाभ पेंशनर को मिलने लगेगा।

ऐसे होगी ऑनलाइन प्रॉसेस
रिटायर्ड कर्मचारी ये प्रमाण अपने फोन के जरिए देंगे। दरअसल फोन पर आईएफएमएस का एप डाउनलोड होगा जो कि सीधे ट्रेजरी के इस सॉफ्टवेयर से लिंक होगा। जिसके लिए हर रिटायर्ड कर्मचारी को एक यूनिक कोड भी दिया जाएगा। फिंगर प्रिंट भी फोन पर ही देने होंगे और ट्रेजरी को रिटायर्ड कर्मचारी के जिंदा होने का प्रमाण मिल जाएगा।

6 माह के भीतर पेंशनर्स के लिए ऑनलाइन वेरिफिकेशन प्रॉसेस काम करना शुरू कर देगी। इनीशियली इस पर काम शुरू कर दिया गया है। इसके बाद रिटायर्ड कर्मचारी घर बैठे अपने जीवित होने का प्रमाण ट्रेजरी में दाखिल कर सकेंगे।

- नरेंद्र सिंह, मुख्य कोषाधिकारी