नेक चंद 1947 में विभाजन के बाद चंडीगढ़ पहुंचे
कानपुर। चंडीगढ़ के खूबसूरत रॉक गार्डन का निर्माण करने वाले लीजेंड आर्टिस्ट नेक चंद का जन्म 15 दिसंबर 1924 में बरियाला कलां में  हुआ था। यह स्थान आज पाकिस्तान में है। यह 1947 में विभाजन  के बाद चंडीगढ़ पहुंचे थे।

नेक चंद ने दी थी चंडीगढ़ को ये अनमोल धरोहर,कबाड़ से बने राॅक गार्डन की खूबसूरती देख ठहर जाएगी नजर

चंडीगढ़ में रोड इंस्पेक्टर के तौर पर सेवाएं दी थीं

मिड डे की एक रिपोर्ट के मुताबिक नेक चंद ने 1950 और 1960 के दशक में चंडीगढ़ में रोड इंस्पेक्टर के तौर पर पब्लिक वर्कस डिपार्टमेंट में अपनी सेवाएं दी थीं। चंडीगढ़ को रिडिजाइन करने श्रेय इनको ही दिया जाता है।

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टूटा फूटा सामान इकट्टा करना शुरू कर दिया

नेक चंद ने 1958 में टूटा फूटा सामान इकट्टा करना शुरू कर दिया था। कहा जाता है कि जिस सामान को लोग बेकार सझकर फेंकते थे उसे इन्होंने सहेज कर रखा।इस गार्डन के निर्माण में नेक चंद ने रात में भी काम किया।

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कबाड़ एकत्र कर खूबसूरत कलाकृतियां बनार्इ
नेक चंद ने टूटी हुए चूड़ियों, कटलरी, चिनावेयर, स्विचिंग, प्लग और ट्यूब-रोशनी, पत्थर, टाइल, घरेलू जंक, पत्थरों जैसी चीजों से  खूबसूरत कलाकृतियां बनार्इ थीं। 18 साल की कड़ी मेहनत ने इन्होंने चंडीगढ़ को अनमोल धरोहर दी।

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बगीचे में झरने, खुली हवा थियेटर और पूल भी
चंडीगढ़ का यह खूबसूरत रॉक गार्डन 35-एकड़ परिसर में चंडीगढ़ के सेक्टर 1 में स्थित है।  खास बात तो यह है कि यहां झरने, खुली हवा थियेटर और पूल भी हैं। रॉक गार्डन को नेक चंद सैनी के नाम से भी पहचाना जाता है।

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विदेशों में भी काफी लोकप्रिय थे नेक चंद सैनी

नेक चंद विदेशों में भी लोकप्रिय भारतीय कलाकाराें में शामिल थे। उनकी रचनाएं पेरिस, लंदन, न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डीसी और बर्लिन जैसे प्रमुख शहरों का हिस्सा थीं। नेक चंद पर विभिन्न भाषाओं में कई किताबें भी लिखी गर्इं।

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नेक चंद को 1948 में पद्म श्री पुरस्कार  मिला
नेक चंद को विभिन्न देशों में मानद नागरिकता की पेशकश की गई थी।भारतीय कला में उनके योगदान को देखते हुए छोटे-बड़े अनेक पुरस्कार मिले। खास बात तो यह है कि नेक चंद  को 1984 में पद्म श्री पुरस्कार भी मिला था।

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