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RANCHI: झारखंड पुलिस के स्पेशल ब्रांच में पदस्थापित दारोगा जाली नोटों के सौदागरों को एस्कॉर्ट करती है और बॉर्डर से बिहार के रास्ते भेजती है. इसका खुलासा साहेबगंज बड़हरवा थाने से निलंबित थानेदार अर्जुन तिवारी ने किया है. अर्जुन तिवारी ने जब इस मामले में हस्तक्षेप किया तो उस पर फर्जी आरोप लगाकर रेल डीआईजी से सस्पेंड करवा दिया. जबकि, रेल एसपी निधि द्विवेदी ने उन्हें रीलिज किया था. अर्जुन तिवारी रांची में रह रहे हैं और अपने निलंबन से आहत होकर डीजीपी डीके पांडेय से भी मिले. अर्जुन तिवारी के खुलासे का वीडियो दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के पास है.

क्या है मामला
गौरतलब हो कि मई, 2018 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पश्चिम बंगाल के मालदा और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते देश में नकली नोटों का कारोबार करने वाले एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था. पुलिस ने इस मॉड्यूल के एक गुर्गे को दिल्ली के सीलमपुर मेट्रो स्टेशन के पास से आठ लाख रुपए के जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था. चौंकाने वाली बात ये है कि पकड़ में आए शख्स कामिल के पास से जो जाली नोट मिले हैं वो सभी दो हजार के नोट थे. पुलिस ने कामिल के पास से एक फोन भी बरामद किया था. उस मोबाइल में झारखंड के साहेबगंज से लेकर पश्चिम बंगाल के कई सफेदपोशों का नाम भी मिला था, जो जाली नोटों के कारोबार में लिप्त थे.

मालदा के मारूज से खुला था राज
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल पिछले कई महीनों से मालदा के रहने वाले मारूज के पीछे पड़ी थी. पुलिस के पास इस बात के पुख्ता सबूत थे कि ये शख्स बांग्लादेश के रास्ते जाली नोट भारत लाता है और फिर पूरे देश में अपने नेटवर्क के जरिए उन्हें फैला देता है. शामली के कैराना का रहने वाला कामिल भी मारूज के लिए ही काम करता था.

8 लाख की कीमत 2.5 लाख
कामिल मारुज के भेजे के गए 8 लाख के जाली नोट लेकर दिल्ली पहुंचा था और यहां पर उसे वो नोट सीलमपुर इलाके में किसी को देने थे. पुलिस को इसकी भनक लग गई, लिहाजा पुलिस की टीम कामिल के पीछे लग गई. पुलिस की टीम ने बहुत देर तक इंतजार किया, लेकिन कामिल से जाली नोट लेने कोई नहीं पहुंचा और जब कामिल वापस लौटने लगा तो पुलिस ने उसे रोक कर उसके बैग की तलाशी ली. बैग में दो हजार के नोटों की चार गड्डी मिली, जो कि सभी नकली थीं. कामिल ने पुलिस को बताया कि 8 लाख के नोट उसे मालदा के मारूज ने 2.5 लाख में दिए थे.