नकली दवाओं के सिंडीकेट को बढ़ावा दे रहे नामी चिकित्सक

मेडिकल एजेंसीज से रिनाउंड डॉक्टरों को नकली दवाएं बेचे जाने का मिला रिकार्ड

लखनऊ से लाकर इलाहाबाद में खपाई जा रहीं नकली दवाएं

vineet.tiwari@inext.co.in

ALLAHABAD: लखनऊ से इलाहाबाद में नकली दवाओं की खेप पहुंचाई जा रही है. मेडिकल एजेंसियां इन दवाओं को शहर के रिनाउंड हॉस्पिटल्स में खपा रही हैं. इनसे दवा कारोबारियों के साथ ही नामी गिरामी डॉक्टर भी मोटा मुनाफा कमा रहे हैं. इस काले कारोबार की मार मरीजों पर पड़ रही है, जिन्हें मोटी रकम खर्च करने के बाद भी समुचित उपचार मिलना मुश्किल हो गया है.

लखनऊ से आयी खेप

सोमवार को लखनऊ के मेडिकल मार्ग स्थित निखिल फार्मा में छापे के दौरान भारी मात्रा में मेरोप्लान वन ग्राम नकली इंजेक्शन बरामद किए गए. टीम की पूछताछ में पता चला कि इस बैच के नकली इंजेक्शन इलाहाबाद के तीन दवा व्यापारियों को भी सप्लाई किए गए हैं. यह जानने के बाद ड्रग डिपार्टमेंट एलर्ट हो गया और जानकारी इलाहाबाद के संबंधित अधिकारियों को दी गई.

एजेंसियों पर पड़ी रेड

सूचना के आधार पर मंगलवार को लीडर रोड स्थित तीन बड़ी मेडिकल एजेंसियों में एक साथ छापेमारी की गई. इनमें से न्यू अग्रवाल केमिस्ट के यहां पता चला कि उसने इस बैच के 64 नकली इंजेक्शन निखिल फॉर्मा से खरीदे थे. इन्हें एल्गिन रोड स्थित एक रिनाउंड हॉस्पिटल को बेचा गया था. एजेंसी ने इसकी बिलिंग भी दिखाई. हालांकि, ड्रग विभाग की पूछताछ में संबंधित हॉस्पिटल के मालिक ने इन दवाओं की खरीद से इंकार कर दिया. लीडर रोड पर ही स्थित पारख मेडिकल एजेंसी के यहां भी निखिल फार्मा से खरीदे गए दस इंजेक्शन का खुलासा हुआ है. हालांकि इनके बैच नंबर अलग है इसलिए उनकी सैंपलिंग कर जांच के लिए लैब भेजा गया है. इसी मेडिकल एजेंसी में 70 हजार रुपए की बगैर बिलिंग दवाओं को भी जब्त कर लिया गया है.

फर्जी निकले बिल

तीसरी एजेंसी आरबी फार्मा में भी निखिल फार्मा से दस इंजेक्शन खरीदे जाने के दस्तावेज मिले. इनको किसे बेचा गया यह पता नहीं चला क्योंकि सभी बिल फर्जी पाए गए. साथ ही खरीद का रिकार्ड भी कम्प्यूटर की जांच में पता चला, जबकि मैनुअल रिकार्ड लापता थे.

बड़े पैमाने पर चल रहा खेल

बता दें कि एबॉट कंपनी के मेरो प्लान वन ग्राम इंजेक्शन के एक डोज की कीमत बाजार में 2700 रुपए है. यह हायर एंटीबायटिक की श्रेणी में आता है और किडनी फेल्योर जैसी बीमारियों में मरीजों को दिया जाता है. इतने महंगे इंजेक्शन को खरीदना हर मरीज के बस की बात नहीं होती है. इसका फायदा उठाकर नकली इंजेक्शन बनाए जाते हैं और मजबूर मरीजों के साथ धोखाधड़ी की जाती है. दवा व्यवसाय से जुड़े सोर्सेज बताते हैं कि नकली दवाओं का व्यापार काफी बड़े पैमाने पर फैल चुका है. इसमें केवल दवा व्यापारी ही नहीं बल्कि शहर के नामचीन डॉक्टर्स भी इनवाल्व हैं जो कम दामों पर खरीदी नकली दवाओं को मरीजों को पूरे रेट पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाते हैं. आपसी मिलीभगत से करोड़ों-अरबों का यह मकड़जाल फल फूल रहा है.

पहले से लग जाती है छापे की भनक

सोमवार को लखनऊ में निखिल फार्मा में छापेमारी के दौरान नकली इंजेक्शन पकड़े गए थे और इसके ठीक दूसरे दिन इलाहाबाद में छह घंटे तक ताबड़तोड़ छापेमारी को अंजाम दिया गया. मामले को पूरी तरह ड्रग विभाग ने गोपनीय रखा था. अभियान में मंडल के चारों ड्रग इंस्पेक्टर्स को आनन-फानन में बुलाया गया था. बावजूद इसके दवा व्यापारियों को इसकी भनक लग गई. मौके पर संबंधित बैच नंबर का एक भी इंजेक्शन बरामद नहीं हो सका. पुराने रिकार्ड खंगाले जाने पर इसके खरीद-फरोख्त का खुलासा हुआ.

लखनऊ में हुई छापेमारी के बाद पता चला था कि वहां से नकली इंजेक्शन की सप्लाई इलाहाबाद के तीन मेडिकल स्टोर्स पर की गई है. जांच में पता चला कि तीनों जगह लखनऊ की संबंधित फार्मा से इंजेक्शन खरीदे गए हैं. यह भी सामने आया कि यह इंजेक्शन शहर के ही बड़े हॉस्पिटल को बेचे गए हैं. सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं. छापेमारी की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है.

केजी गुप्ता, असिस्टेंट ड्रग कमिश्नर, इलाहाबाद मंडल