आई फालोअप

नकली दवाओं की बुनियाद पर टिकी इलाहाबाद की सेहत

फर्जी बिलिंग पर होता है व्यापार, तलाशने पर नहीं मिलता रिकार्ड

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ALLAHABAD: शहर में हर महीने करोड़ों रुपए का नकली दवाओं का व्यापार होता है. दवा व्यापारियों और डॉक्टरों की मिलीभगत से मरीजों को इलाज के नाम पर खुलकर चूना लगाया जाता है. दवा माफिया इस व्यापार को बड़ी संजीदगी से अंजाम देते हैं. दवा की खरीद से लेकर उसकी सप्लाई तक, पूरा रिकार्ड फर्जी तैयार किया जाता है. एक बार माल खत्म हुआ तो मैनुअल और ऑनलाइन दोनों रिकार्ड ठिकाने लगा दिए जाते हैं. यही कारण है कि छापेमारी या जांच में यह हर बार साफ बचकर निकले में कामयाब होते हैं.

ऐसे चलता है काला कारोबार

इलाहाबाद समेत प्रदेश के कई जिलों में नामी-गिरामी फार्मा कंपनियों की नकली दवाएं तैयार की जाती हैं. दवा माफिया इनकी खरीद-फरोख्त जरूर करते हैं लेकिन पक्के बिल की जगह स्टीमेट पर. अगर पूछताछ होती है तो स्टीमेट दिखाकर बाद में पक्का बिल बनाने का बहाना बनाया जाता है. इसके बाद दवाओं की एंट्री कम्प्यूटर पर भी की जाती है. इन दवाओं के खरीदार पहले से सेट होते हैं और देखते ही देखते नकली माल मार्केट में बिक जाता है. दवा मार्केट के सोर्सेज बताते हैं कि इस पूरी प्रॉसेस में दवा बेचने वाली फर्म और खरीदने वाले हॉस्पिटल के नाम फर्जी दिखाया जाता है. एक बार गोदाम का माल बिका तो बिल को आग को हवाले कर कम्प्यूटर से पूरा डाटा डिलीट कर दिया जाता है.

जांच में सामने आया था यह तथ्य

सोमवार को शहर के लीडर रोड स्थित तीन दवा एजेंसियों में छापे के दौरान यही तथ्य सामने निकलकर आया था. इनमें से एक एजेंसी ने लखनऊ के निखिल फार्मा से हायर एंटीबायटिक इंजेक्शन की खरीद से साफ इंकार किया था लेकिन जब कम्प्यूटर रिकार्ड तलाशा गया तो दवा की खरीद के रिकार्ड सामने नजर आ गया. यह डेटा डिलीट करने में हुई देरी धरपकड़ का कारण बन गई. ड्रग विभाग द्वारा पूछताछ में एजेंसी संचालक इन दवाओं को किसको बेचा गया, यह भी ठीक से नहीं बता पाया. क्योंकि, इंजेक्शन को बेचने के सभी बिल जांच में पूरी तरह फर्जी पाए गए.

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शक के आधार पर हुई थी शिकायत

हायर एंटीबायटिक मेरोप्लान वन ग्राम की कीमत बाजार में 2700 रुपए है. इसे बनाने वाली फार्मा कंपनी एबॉट ने शासन से शिकायत की कि बाजार में यह इंजेक्शन काफी कम रेट पर बिक रहा है. जिसके आधार पर ड्रग विभाग ने लखनऊ के ही निखिल फार्मा में छापेमारी की. यहां से 230 नकली इंजेक्शन जब्त किए गए. यह भी पता चला कि इलाहाबाद के लीडर रोड की तीन दवा एजेंसी में इनकी सप्लाई की गई थी. जिसके आधार यहां भी सोमवार को छापेमारी की गई और हकीकत सामने आ गई. महंगी और डिमांडिंग दवाओं की नकल तैयार कर इसे मार्केट में सस्ते दामों पर बेचकर मरीजों की जान से खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है.

फर्जी बिल के आधार पर केवल नकली दवाएं ही नहीं बल्कि असली दवाओं की खरीद-फरोख्त भी की जाती है. इससे कई तरह के टैक्स भी बचा लिए जाते हैं. इसके बाद पूरा रिकार्ड समाप्त कर दिया जाता है. जिससे जांच में हमें कुछ भी हाथ नहीं लगता और दवा माफिया बच निकलते हैं.

केजी गुप्ता, असिस्टेंट ड्रग कमिश्नर, इलाहाबाद मंडल