2500 से ज्यादा शहर में चल रहे अवैध कोचिंग इंस्टीट्यूट

218 इंस्टीट्यूट ही हैं रजिस्टर्ड

मानकों की खुलेआम उड़ रही धज्जियां

न ही फायर एग्जिट और न ही फायर सेफ्टी सिस्टम का इंतजाम

MEERUT। सूरत के तक्षशिला कॉम्पलेक्स के कोचिंग सेंटर में लगी आग से दर्जनों बच्चों की मौत हो गई। इस घटना से जहां पूरा देश हिल गया है वहीं मेरठ की कोचिंग मंडी भी सवालिया निशानों के घेरे में आ खड़ी हुई है। जमीनी हकीकत की बात करें तो यहां भी हजारों अवैध कोचिंग इंस्टीट्यूट खुलेआम मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और विभाग चैन की नींद सो रहे हैं। लापरवाही की वजह से करीब 5 लाख से ज्यादा बच्चे मौत के मुहाने पर हैं। शनिवार को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की पड़ताल में हैरान करने वाले खुलासे हुए।

218 इंस्टीट्यूट रजिस्टर्ड

उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आंकड़ों में मात्र 218 कोचिंग इंस्टीट्यूट ही रजिस्टर्ड हैं। जबकि असलियत ये है कि कोचिंग मंडियों समेत गली-मोहल्लों में ढाई हजार से भी अधिक इंस्टीट्यूट बेखौफ चल रहे हैं। शहर की पीएल शर्मा रोड, नेहरू रोड, बच्चा पार्क, बेगम बाग, स्टार प्लाजा, शास्त्रीनगर, तेजगढ़ी, विजय नगर, ईस्टर्न व वेस्टर्न कचहरी रोड, गढ़ रोड, कृष्णा प्लाजा, मेट्रो प्लाजा, शिव चौक रोड़, आरजी इंटर कॉलेज, जागृति विहार रोड समेत तमाम जगहों पर कोचिंग सेंटर्स खुले हुए हैं।

नहीं हैं फायर सेफ्टी यंत्र

अधिकतर कोचिंग सेंटर्स में आग से बचाव के इंतजाम नदारद हैं। न तो यहां फायर सेफ्टी सिस्टम लगे हैं न ही फायर एग्जिट समेत आग से बचाव के अन्य इंतजाम हैं। जबकि बेसमेंट में चल रहे इंस्टीट्यूट का हाल और भी बुरा है। छोटे-छोटे कमरों में बच्चों को ठूंस-ठूंस कर पढ़ाया जाता है।

सड़क बनी पार्किंग स्टैंड

कोचिंग इंस्टीट्यूट्स ने सड़कों को ही पार्किंग स्टैंड बना लिया है। सुबह-शाम सड़कों पर वाहनों का तांता लगा रहता है। जबकि आने-जाने के लिए भी सिंगल एट्रेंस है। कॉम्पलेक्स में स्थिति और भी ज्यादा खतरनाक है। कई-कई मंजिलों पर अलग-अलग इंस्टीट्यूट बने हुए हैं। आने-जाने के लिए एक ही एंट्री है। लगातार भीड़ बनी रहती है। कभी भी बड़ा हादसा यहां हो सकता है।

लोड ज्यादा, मीटर लोड कम

हर महीने लाखों की कमाई करने वाले कोचिंग सेंटर्स बिजली चोरी करने में भी पीछे नहीं हैं। यहां कम लोड वाले मीटर पर कई एसी और इलेक्ट्रॉनिक आइटम चलाएं जा रहे हैं। बिजली की तारें बेहद कमजोर हैं। यही नहीं इनके मेंटेनेंस की ओर किसी का ध्यान नहीं जाता। ऐसे में सूरत जैसा हादसा होने में यहां भी वक्त नहीं लगेगा।

रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी

एजुकेशनल सर्टिफिकेट

फायर सेफ्टी ऑफिस की एनओसी व फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट कमर्शियल बिल्डिंग का सर्टिफिकेट

नगर निगम का पार्किंग स्टैंड

कमर्शियल मीटर

आधार कार्ड, वोटर कार्ड, पैन कार्ड आदि

पंजीकरण फीस

1 से 10 बच्चे- 250 रुपये

1 से 20 बच्चे- 1 हजार

1 से 40- 4 हजार

1 से 50- 5 हजार

1 से 100-10 हजार

1 से 200-20 हजार

1 से असीमित- 25 हजार

ये है अनिवार्य

क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से सभी कोचिंग और उच्च शिक्षण संस्थानों को मेन गेट पर फायर सेफ्टी डिटेल्स का डिस्पले करना अनिवार्य है।

डिपार्टमेंट का नंबर-101 बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा होना चाहिए।

रेड कलर बाल्टी, रेत व पानी व अलार्म की उपलब्धता होनी चाहिए।

कर्मचारियों को फायर सेफ्टी यंत्र चलाने की ट्रेनिंग एक बार जरूर होनी चाहिए।

साल में एक बार मॉक टेस्ट जरूर होना चाहिए।

सभी कोचिंग सेंटर्स व हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट्स को फायर सेफ्टी के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है।

राजीव कुमार गुप्ता, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी

इनका है कहना

पीएल शर्मा पर कोचिंग का बहुत बुरा हाल है। यहां घरों के सामने पार्किंग कर देते हैं। पूरी सड़क घेर लेते हैं। कई बार शिकायत भी करते हैं लेकिन कोई सुनता नहीं हैं।

रवि कांता

कोचिंग के स्टूडेंट्स सड़क पर व्हीकल्स पार्क कर देते हैं। हमें बाहर आने-जाने में काफी दिक्कत होती है। मना करने के बावजूद मानते नहीं हैं। कई बार तो उल्टा लड़ने आ जाते हैं।

बिमला कक्कड़

कोचिंग इंस्टीट्यूट्स के लिए सेफ्टी अवेयरनेस प्रोग्राम होने चाहिए। बच्चों को भी बचाव के तरीके बताने चाहिए। इसके अलावा विभागों की ओर से अलर्ट भी जारी होना चाहिए।

आलोक गुप्ता, डायरेक्टर, गुप्ता क्लासेज

कोचिंग सेंटर्स किसी भी अनहोनी के लिए तैयार ही नहीं होते हैं। गर्मियों में एसी से खतरा बढ़ जाता है बावजूद इसके संचालक इस ओर ध्यान नहीं देते हैं।

डॉ। विशाल तिवारी, एक्सपर्ट, ईहा नॉलेज कैंपस