पांच मौतों के बाद परिवार के लोग थाने और पोस्टमार्टम हाउस का चक्कर लगाते रहे

रात में ही शवों को कब्जे में लेने के बाद भी पुलिस ने शाम चार बजे पहुंचाए कागजात

कागजात नहीं आने के कारण शवों का नहीं हो पा रहा था पोस्टमार्टम, दिनभर बिलखते रहे परिवार वाले

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ALLAHABAD: साहब लोग इन्हें पब्लिक का मित्र बनाने पर तुले हैं. इसके लिए आए दिन आदेश-निर्देश जारी होते रहते हैं, लेकिन फिर भी इलाहाबाद की पुलिस बेदर्द बनी हुई है. इसका नजारा मंगलवार को तब हुआ जब तीन पोतियों, बेटा और बहू की लाश पाने के लिए एक बुजुर्ग आंखों में आंसू लिए दिनभर पुलिस स्टेशन और पोस्टमार्टम हाउस का चक्कर लगाता रहा लेकिन साहब लोग अपने में मस्त रहे. जिन शवों को सोमवार की रात में ही कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा दिया गया उनके पोस्टमार्टम के लिए कागज मंगलवार को शाम चार बजे के बाद पहुंचाया गया.

चेहरे पर नहीं दिखी शिकन

शाहउर (कुशवाहा बस्ती) पीपल गांव में सोमवार की रात पत्‍‌नी श्वेता और तीन मासूम बेटियों सृष्टि, शिवानी व सोनू की हत्या के बाद मनोज कुशवाहा ने आत्महत्या कर ली थी. मामले में इंस्पेक्टर धूमनगंज की लापरवाही का आलम ये रहा कि बीती रात की घटना के बाद भी पोस्टमार्टम के लिए जरूरी कागजात मंगलवार की शाम चार बजे के बाद पहुंचे. इसके कारण पूरे दिन मनोज के परिजन एसआरएन पुलिस चौकी के बाहर कागजात के इंतजार में रोते बिलखते रहे.

सुबह दस बजे ही आ गए

मंगलवार को पांचों शवों का पोस्टमार्टम होना था. इसके लिए सुबह दस बजे ही मनोज कुशवाहा के पिता समेत परिवार के अन्य लोग एसआरएन पुलिस चौकी पहुंच गए. इसके बाद शुरू हुआ इंतजार शाम तक जारी रहा. मनोज के बड़े भाई कल्लू कुशवाहा ने बताया कि सुबह से ही पोस्टमार्टम कराने के लिए कागज का इंतजार कर रहे थे. कागजात नहीं पहुंचने के कारण एसआरएन पुलिस चौकी पर ही पूरा परिवार और रिश्तेदार बैठे रहे. शाम चार बजे के बाद कागजात पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा. तब पोस्टमार्टम शुरू हो सका.

पोस्टमार्टम के लिए कागजात पहुंचने में देरी की जानकारी फिलहाल मुझे नहीं है. इस बारे में पता करने के बाद ही कुछ कह पाऊंगा.

श्रीश्चन्द्र

सीओ सिविल लाइन