-स्टूडेंट्स कर रहे अनोखी पहल, यादगार बन रही है क्लास

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क्कन्ञ्जहृन्: शिक्षा इंसान का सबसे बड़ा धन है और इस धन से ही हर सपना पूरा किया जा सकता है, लेकिन शिक्षा के ट्रैक पर दौड़ाने वाले गुरु नहीं मिले तो फिर जीवन अंधकारमय हो जाता है. लेकिन कई परिवार आज भी ऐसे हैं जो अपने बच्चों को शिक्षा की चौखट ही पार नहीं करने देते हैं. इनके ऐसे परिवारों की सोच बदलने का काम कर रहे हैं पटना के पांच युवक. यह पांचों युवा खुद तैयारी कर रहे हैं और समाज के उस वर्ग में भी शिक्षा की लौ जला रहे हैं जो अब तक अंधकार में थे. वर्ष 2013 से वह पटना के अलग अलग एरिया में ज्ञान का दीप जला रहे हैं.

ऐसे जली शिक्षा की ज्योति

पटना में इन पांच अनोखे गुरु में मुरली झा भी शामिल हैं. उनका कहना है कि खुद पटना में रहकर तैयारी कर रहे हैं और प्रशांत सिंह, अभिनव शर्मा, रजनीश झा और संतोष कुमार के साथ बच्चों को पढ़ा रहे हैं. मुरली बताते हैं कि विकास का आधार शिक्षा है और इसमें कोई पीछे रह गया तो फिर हम पीछे हो जाएंगे. ऐसे में हम लोग खुद की पढ़ाई के साथ उस वर्ग को भी शिक्षित करने में जुट गए जिसके बच्चे स्कूल का मुंह देखे ही नहीं थे. वह युवा गायत्री प्रज्ञा युवा प्रकोष्ठ से जुड़कर वह

पटना में कई जगह बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं. पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन से लेकर कई कई ऐसे स्थानों पर वह संबंधित एरिया के बच्चों को जुटाते हैं और उन्हें शिक्षित करते हैं.

मुरली का कहना है कि जिस घर में शिक्षा का नामोनिशान नहीं था वहां के बच्चे अब इंग्लिश बोल रहे हैं.

दोस्तों का गु्रप बनाकर ज्ञान का सोपान

मुरली झा बताते हैं कि बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़कर खुशी मिलती है. अब तक सैकड़ों बच्चों को वह स्कूल से जोड़ चुके हैं. उनका कहना है कि वह दोस्तों का गु्रप बनाकर बच्चों को पढ़ा रहे हैं. वह और उनके दोस्त इस काम के ऐसे दीवाने हैं कि जो पैसा घर से भी मिलता है उसे भी उन बच्चों को शिक्षित करने में लगा देते हैं.